भारत की राजधानी दिल्ली में सऊदी दूतावास के बाहर आले सऊद और चरमपंथी वहाबियों के ख़िलाफ़ ज़ोरदार प्रदर्शन हुए।

सैकड़ों शिया युवाओं और धर्मगुरुओं ने रविवार को सऊदी दूतावास के बाहर प्रदर्शन करके चरमपंथी वहाबियों के हाथों जन्नतुल बक़ी में पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों में से चार इमामों के मज़ारों को ध्वस्त किए जाने की कड़ी निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने आले सऊद मुर्दाबाद, आतंकवादी मुर्दाबाद के नारे लगा कर जन्नतुल बक़ी में इमामों के मज़ारों के पुनर्निर्माण की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारी, सऊदी दूतावास के क़रीब जाना चाह रहे थे लेकिन पुलिस ने रुकावटें खड़ी करके उन्हें एेसा करने से रोक दिया।

 

प्रदर्शन में भाग लेने वाले एक शिया धर्मगुरू ने भारत सरकार से मांग की कि वह आतंकियों की सबसे बड़ी समर्थक सरकार के रूप में सऊदी अरब से अपने संबंधों का स्तर घटा दे। दिल्ली के इमामे जुमा सैयद मोहसिन तक़वी ने जन्नतुल बक़ी में इमामों की क़ब्रों के विध्वंस की कड़ी निंदा करते हुए इसे इस्लाम और पैग़म्बरे इस्लाम से आले सऊद की दुश्मनी का प्रमाण बताया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ से मांग की कि वह बक़ी में किए गए अपराध के संबंध में अपनी चुप्पी तोड़े और इमामों के मज़ारों के पुनर्निर्माण के लिए कोशिश करे। ज्ञात रहे कि आठ शव्वाल वर्ष 1344 हिजरी को अब्दुल अज़ीज़ बिन सऊद के नेतृत्व में वहाबियों ने मक्के पर क़ब्ज़ा करने के बाद पवित्र मदीना नगर पर हमला कर दिया था और वहां जन्नतुल बक़ी नामक क़ब्रिस्तान में पैग़म्बर के वंश के चार इमामों के मज़ारों को ध्वस्त कर दिया था। एक रिवायत के अनुसार जन्नतुल बक़ी में पैग़म्बरे इस्लाम की सुपुत्री हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की भी क़ब्र है। (HN)

 

Jul १७, २०१७ १५:३८ Asia/Kolkata
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