• महाराष्ट्र बंद के दौरान भड़की हिंसा

दलित सैनिकों के हाथों ऊंचि जाति के मराठा शासकों को हराने के लिए अंग्रेज़ों के साथ लड़ी गयी लड़ाई की 200वीं वर्षगांठ के अवसर पर पूणे से 30 किलोमीटर दूर भीमा कोरेगांव देहात में इस लड़ाई की याद को मनाने के लिए सोमवार को इकट्ठा हुए लाखों दलितों और दक्षिण पंथी समूहों के बीच हुयी झड़प की घटना के मद्देनज़र, बुधवार को बुलाए बंद के दौरान हिंसा का समाचार है।

महाराष्ट्र में दलित संगठनों के बंद के आहवान के बीच, मुंबई में एक बार फिर बसों को निशाना बनाया गया। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान रेल सेवा को भी बाधित किया।

दलित नेता, भीमा कोरेगांव लड़ाई की 200वीं सलागिरह के दौरान भड़की हिंसा का विरोध कर रहे हैं। बंद के मद्देनज़र सुरक्षा के व्यापक उपाय किए गए और स्कूलों व बाज़ारों को बंद रखा गया। मुंबई पुलिस ने मंगलवार को हिंसक प्रदर्शन के संबंध में 9 मामले दर्ज किए हैं। मुंबई में मंगलवार से लेकर अब तक 100 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।

नागपूर में भी हालात तनावपूर्ण बताए जाते हैं जहां बुधवार को शिक्षण संस्थानों और व्यापारिक केन्द्रों को बंद रखा गया। कई संवेदनशील इलाक़ों में विरोध मार्च निकलने का भी समाचार है।

पूणे में सरकारी बसों पर पथराव की कुछ घटनाओं को छोड़कर बंद शांतिपूर्ण रूप से शुरु हुआ।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि शहर में काफ़ी संख्या में पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है और लोगों से अपील की गयी है कि वे क़ानून हाथ में न लें।

महाराष्ट्र के कुछ दूसरे क्षेत्रों से भी आगज़नी की रिपोर्टें मिली हैं।

दिल्ली में छात्रों ने भी महाराष्ट्र सदन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।

ग़ौरतलब है कि सोमवार को महाराष्ट्र में तनाव उस वक़्त शुरु हुआ था जब लाखों दलित पुणे से 30 किलोमीटर दूर भीमा कोरेगांव देहात में उस लड़ाई की 200वीं सालगिरह मनाने के लिए जमा हुए थे जिसमें दलित सैनिकों ने ऊंची जाति के मराठा शासकों को हराने के लिए लड़ाई लड़ी थी। समारोह के दौरान दलितों और दक्षिण पंथी समूहों के बीच झड़प शुरु हो गयी थी जिसमें ऊंची जाति के एक युवक की मौत हो गयी।(MAQ/N)

 

Jan ०३, २०१८ १९:०३ Asia/Kolkata
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