• अफ़ज़ल गरू की बर्सी पर कश्मीर में हड़ताल

भारत नियंत्रित कश्मीर में कश्मीरी नेता अफ़ज़ल गुरू की पांचवीं बर्सी पर पूर्ण रूप से शटर डाउन रहा और सभी दुकानें और कारोबारी संस्थान बंद रहे, सड़कों भी सुनसान रहीं।

कश्मीर मीडिया सर्विस के अनुसार अलगाववादी नेताओं सैयद अली शाह गीलानी, मीर वाएज़ उमर फ़ारूक़ और मुहम्मद यासीन मलिक की काल पर शुक्रवार को नमाज़ के बांद प्रदर्शन किया गया और मुहम्मद अफ़ज़ल गुरू तथा एक अन्य कश्मीरी नेता मुहम्मद मक़बूल बट की लाशों को तिहाड़ जेल से कश्मीर लाए जाने की मांग की गई।

आगामी 11 फ़रवरी को मुहम्मद मक़बूल बट की बर्सी पर भी कश्मीर में आम हड़ताल की घोषणा की गई है। इस दिन श्रीनगर में सोनवार के स्थान पर संयुक्त राष्ट्र संघ के पर्यवेक्षकों के कार्यालय की ओर मार्च किया जाएगा और ज्ञापन सौंपा जाएगा जिसमें संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव से मांग की जाएगी कि अफ़ज़ल गुरू और मक़बूल बट के शव कश्मीरियों के हवाले करवाने में मदद करें।

दूसरी ओर मुहम्मद अफ़ज़ल गुरू और मुहम्मद मक़बूल बट की बर्सी मनाने की घोषणा के बाद अलगाववादी नेताओं को रोकने के लिए कश्मीर की राज्य सरकार ने सैयद अली शाह गीलानी, मीर वाएज़ उमर फ़ारूक़, यासीन मलिक, अशरफ़ सहराई, मुख़तार अहमद वाएज़ा और सैयद इमतियाज़ हैदर सहित कई अलगाववादी नेताओं को नज़रबंद कर दिया।

ज्ञात रहे कि अफ़ज़ल गुरू को नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में सन 2013 में फ़ांसी दे दी गई थी जबकि मुहम्मद मक़बूल बट को 11 फ़रवरी 1984 को इसी जेल में फांसी दी गई थी। दोनों की लाशों के जेल परिसर में दफ़्न कर दिया गया था।

अफ़ज़ल गुरू पर आरोप था कि उन्होंने भारतीय संसद पर हमला किया था। इस मामले में अदालत ने उन्हें सज़ाए मौत सुनाई थी।

 

Feb ०९, २०१८ १७:३४ Asia/Kolkata
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