Dec १५, २०१८ १९:१७ Asia/Kolkata
  • राफ़ेल डील पर सुप्रीम कोर्ट को ग़लत दस्तावेज़ देने पर मोदी सरकार का यू-टर्न

राफ़ेल युद्धक विमानों की ख़रीद में हुए कथित भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट को झूठे दस्तावेज़ दिए जाने पर मचे सियासी घमासान के बीच मोदी सरकार ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया है।

सरकार ने याचिका दाख़िल कर राफ़ेल डील पर दिये गए फैसले में एक ''तथ्यात्मत सुधार'' की मांग की है। केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से फैसले के उस पैराग्राफ़ में संशोधन की मांग की है, जिसमें कैग रिपोर्ट और संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के बारे में संदर्भ है।

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने फैसले में कहा था कि कैग के साथ क़ीमत के ब्यौरे को साझा किया गया और कैग की रिपोर्ट पर पीएसी ने ग़ौर किया।

अदालत के फैसले के पैराग्राफ 25 में इसका जिक्र है, फैसले में कहा गया था कि फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की ख़रीदारी में किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई। फैसले में कहा गया कि उसके सामने रखे गए साक्ष्य से पता चलता है कि केंद्र ने राफेल लड़ाकू विमान पर मूल्य के विवरणों को संसद से साझा नहीं किया, लेकिन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के सामने इसे उजागर किया गया।

शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद कांग्रेस नेता और पीएसी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनके सामने इस तरह की रिपोर्ट नहीं आयी थी।

मोदी सरकार पर सुप्रीम कोर्ट को ग़लत दस्तावेज़ देने के आरोपों के बाद, सरकार अब उसमें सुधार के लिए कोर्ट में हलफ़नामा सौंपा है।

हलफ़नामे में कहा गया है कि सौंपे गए दस्तावेज़ों में टाइपिंग की ग़लती हो गई थी, जिसके कारण कोर्ट ने ग़लत व्याख्या कर दी। msm

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