Dec १६, २०१८ १६:३५ Asia/Kolkata
  • राफ़ेल मामले पर उच्चतम न्यायालय में झूठी जानकारी देने पर सरकार पर कांग्रेस का हमला

राफ़ेल सौदे पर उच्चतम न्यायालय में ग़लत हलफ़नामा देने पर कांग्रेस और भाजपा के बीच घमासान बढ़ गया है।

भारत के उच्चतम न्यायालय की ओर से इस मामले में फ़ैसला आने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। कांग्रेस ने सरकार पर ग़लत तथ्य पेश करने, संसद और न्यायालय की अवमानना का आरोप लगाते हुए सर्वोच्च न्यायालय से निर्णय वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस ने सरकार की तरफ़ से अदालत के निर्णय में तथ्यात्मक सुधार करने वाली याचिका का उल्लेख करते हुए कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय को अपना निर्णय वापस लेना चाहिए और झूठे सबूत पेश करने के कारण सरकार को न्यायालय की अवमानना का नोटिस जारी करना चाहिए। राज्यसभा में विपक्ष से उपनेता आनंद शर्मा ने कहा कि हम पहले भी कह चुके हैं कि इस मामले में जांच केवल संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ही कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को गुमराह किया जिसके आधार पर यह फ़ैसला आया।

 

आनंद शर्मा ने कहा कि संविधान के हिसाब से देश की सबसे बड़ी संस्था भारत की संसद है और अगर प्रधानमंत्री मे ग़लत नहीं किया तो वे संयुक्त संसदीय समिति के सामने क्यों नहीं आते? इस बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा में राफ़ेल मामले का उल्लेख करते हुए कहा है कि देश देख रहा है कि कांग्रेस उन ताक़तों के साथ खड़ी है जो हमारी सेना को मज़बूत नहीं होने देना चाहतीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता की भाषा पर पाकिस्तान में तालियां बजती हैं।

 

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को राहत देते हुए राफ़ेल विमान सौदे की अदालत की निगरानी में जांच संबंधी सभी जनहित याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया था। फ़ैसला सामने आने के बाद विपक्षी दल कांग्रेस ने अदालत के आदेश के पैराग्राफ़ नंबर पच्चीस पर आपत्ति कर दी जिसमें कहा गया था कि राफ़ेल के मूल्यों का विवरण CAG को दे दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) ने लोक-लेखा समिति (PAC) को दी और उसका एक संपादित हिस्सा संसद के समक्ष रखा गया। उच्चतम न्यायालय की इस टिप्पणी ने केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया क्योंकि इस तरह की कोई रिपोर्ट PAC के सामने आई ही नहीं। (HN)

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