Mar २२, २०१९ २०:१६ Asia/Kolkata
  • लालकृष्ण आडवाणी का क्यों कटा टिकट और अमित शाह को ही क्यों मिली गंधीनगर सीट?

भारत में चनाव से पहले इस देश की सत्ताधारी पार्टी ने कुछ ऐसा फ़ैसला लिया है कि जिसने पूरे भारत की राजनीति में हलचल मचा दी है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत की सत्तारूढ़ पार्टी “बीजेपी” ने आम चुनाव के कुल 184 उम्मीदवारों की सूची घोषित कर दी है। घोषित की गई सूची में गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर की बहुचर्चित सीट भी शामिल है। गंधीनगर सीट से बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी 6 बार जीतकर संसद पहुंचे हैं, लेकिन इस बार बीजेपी ने उनकी जगह पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को टिकट दिया है। बीजेपी की राजनीति के 'पितामह' माने जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी का टिकट कटने को लेकर न केवल भारतीय जनता पार्टी के भीतर हलचल है बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं आ रहीं हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय लोग केवल इन सवालों के जवाब चाह रहे हैं कि आख़िर आडवाणी का टिकट क्यों कटा और अमित शाह को गंधीनगर ही से क्यों टिकट मिला?

भारतीय मीडिया की के सूत्रों के अनुसार भाजपा की गुजरात इकाई ने मांग की थी कि या तो नरेन्द्र मोदी को या शाह को इस बार राज्य से संसदीय चुनाव में उतारा जाए। प्रदेश भाजपा नेताओं ने यह भी मांग की थी कि अमित शाह गांधीनगर से चुनाव लड़ें। पार्टी पर्यवेक्षक निमाबेन आचार्य ने बताया था कि भाजपा ने 16 मार्च को पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की राय जानने के लिए गांधीनगर में पर्यवेक्षकों को भेजा था और इनमें से अधिकतर ने अमित शाह का पक्ष लिया, जबकि बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी जो कि छह बार गांधीनगर सीट पर जीत दर्ज कर चुके हैं उनके पक्ष में बहुत ही कम लोग थे।

वैसे तो गांधीनगर संसदीय सीट के ही तहत नारणपुरा से अमित शाह विधायक रहे चुके हैं और फिलहाल अमित शाह राज्यसभा सांसद हैं। पार्टी नेताओं का मानना था कि अमित शाह के लड़ने से गुजरात में 'मिशन 26' पूरा करने में मदद मिल सकती है। यूं तो पार्टी की एक बैठक के बाद यह कहा गया था कि मार्गदर्शक मंडल के सदस्य 91 वर्षीय आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के लड़ने का फ़ैसला उन पर छोड़ दिया गया है। हालांकि भारतीय मीडिया के मुताबिक़ आडवाणी से पार्टी ने अभीतक कोई संपर्क नहीं किया है।

इस बीच विपक्ष के कई नेता और राजनीतिक टीकाकारों का मानना है कि मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने जिस तरह लालकृष्ण आडवाणी को धीरे-धीरे पार्टी से किनारे किया है वह एक अच्छी राजनीति से बहुत दूर है और साथ ही भारतीय संस्कारों का भी इसका कोई संबंध नहीं है। ऐसे सभी नेताओं और टीकाकारों का कहना था कि जो लोग अपने बड़े-बूढ़ों का अपमान करते हैं वे लोग आगे चलकर स्वयं अपमानित होते हैं। (RZ)

 

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