Apr २३, २०१९ २०:३४ Asia/Kolkata
  • अमेरिका के एकपक्षीय फ़ैसले के आगे मोदी सरकार ने घुटने टेक दिए, देश की जनता को जवाब दें मोदी, भारत के विपक्षी दलों की मांग

अमेरिका ने भारत, चीन समेत जिन 8 देशों को ईरान से तेल ख़रीदने की छूट दी थी अब उस छूट को वॉशिंग्टन ने समाप्त करने का एलान किया है। अमेरिका की इस घोषणा के बाद भारत के तेल बाज़ार में हड़कंप मच गया है।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, इस्लामी गणतंत्र ईरान से भारत द्वारा आयात किए जा रहे तेल पर अमेरिका ने पूरी तरह रोक लगाने का एकपक्षीय फ़ैसला किया है। अमेरिका द्वारा इस तरह के एकपक्षीय निर्णय पर दिल्ली की मोदी सरकार द्वारा कोई विशेष प्रतिक्रिया न व्यक्त किए जाने पर भारत के विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की है। समाचार एजेंसी इर्ना की रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत के विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने मंगलवार को एक बयान जारी करके मोदी सरकार की कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार, वॉशिंग्टन सरकार के एकपक्षीय निर्णय के आगे नतमस्तक दिखाई दे रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि अमेरिका द्वारा भारत के लिए यह फ़ैसला लिया जाना कि वे किस से तेल ख़रीदे और किस से न ख़रीदे यह मोदी सरकार की विदेश निती की हार को दर्शाता है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने अपने बयान में कहा है कि ईरान से तेल की ख़रीद के संबंध में मिलने वाली छूट की समय सीमा में वृद्धि न ले पाना और अमेरिकी फ़ैसले के आगे घुटने टेक देना यह भारत सरकार की ग़लत आर्थिक और कूटनीतिक नीतियों को दर्शाता है। कम्युनिस्ट पार्टी ने मांग की है कि मोदी, इस संबंध में भारत की जनता को जवाब दें। कांग्रेस पार्टी ने अपने बयान में कहा है कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने देश में जारी आम चुनाव के मद्देनज़र केवल मतदाताओं के वोट पाने के लिए भारतीय तेल कंपनियों को इस बात के लिए मजबूर कर रखा है कि तेल और डीज़ल की क़ीमतों में चुनाव के अंत तक बढ़ोतरी न होने पाए।

ज्ञात रहे कि भारत में आम चुनाव हो रहे हैं जो 11 अप्रैल से आरंभ हुए हैं और 19 मई तक जारी रहेंगे। (RZ)

 

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