यूरोपीय संघ की परिषद ने एक बार फिर ईरान में मानवाधिकारों के हनने के बहाने तेहरान विरोधी प्रतिबंधों को एक वर्ष के लिए और बढ़ा दिया है।

यूरोपीय परिषद ने एक विज्ञप्ति जारी करके घोषणा की है कि यह परिषद ईरान में मानवाधिकारों का हनन जारी रहने के कारण अपने प्रतिबंधों की अवधि को जारी वर्ष के 11 अप्रैल से अगले वर्ष के 13 अप्रैल तक बढ़ा रही है। इन प्रतिबंधों के अनुसार कुछ ईरानी अधिकारी यूरोप की यात्रा नहीं कर सकेंगे और इसी प्रकार यूरोप में ईरानी संपत्ति को रोक लिया जायेगा।

इस बात में कोई संदेह नहीं है कि मानवाधिकारों का मामला एक अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय है परंतु यह विषय भी अंतरराष्ट्रीय चिंता के विषय में परिवर्तित होता जा रहा है कि मानवाधिकार का विषय दूसरे देशों पर दबाव डालने के हथकंडे में परिवर्तित होता जा रहा है।

बड़े खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि आज विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में जो बहुत सी अप्रिय घटनाएं घट रही हैं वह इसी भेदभावपूर्ण नीति का परिणाम हैं। विश्व में दोपहरे मापदंड की कार्यवाहियों के बहुत सारे नमूने हैं।

जैसे मानवाधिकारों की रक्षा का राग अलापने वाले पश्चिमी देश सऊदी अरब और जायोनी शासन को हथियार देते हैं और उनके हथियारों से अब तक फिलिस्तीन, इराक, यमन और अफगानिस्तान सहित विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं। मारे जाने वालों में बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं।

मानवाधिकार के संबंध में यूरोपीय परिषद के क्रिया कलापों में स्पष्ट विरोधाभास को देखा जा सकता है। तेहरान के विरुद्ध यूरोपीय परिषद ने अपने प्रतिबंधों की जो अवधि बढ़ाई है उसे इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। यूरोपीय परिषद ने मानवाधिकार के संबंध में तेहरान के विरुद्ध जो कदम उठाया है उसका लक्ष्य यह दर्शाना है कि ईरान में आज़ादी नहीं है और इस्लामी व्यवस्था के विरोधियों का दमन किया जाता है और यह परिषद इस बहाने से ईरान को उन संसाधनों के निर्यात की दिशा में बाधा बनानी चाहती है जिससे उसके अनुसार ईरान के भीतर सरकार विरोधियों का दमन हो सकता है।

यूरोप के इस प्रतिबंध का दूसरा लक्ष्य ईरान के साथ वार्ता का द्वार खोले रखना और ईरान के विरुद्ध प्रतिबंधों के जारी रहने का औचित्य दर्शाना है। यह उस स्थिति में है जब अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों में मानवाधिकार के संबंध में जो बातें सामने आती हैं वे इस बात की सूचक हैं कि इन देशों के क्रिया कलाप और मानवाधिकार में काफी दूरी है।

मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरने वाले दूसरों पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाकर स्वयं को मानवाधिकारों का रक्षक दिखाना और अपने वास्तविक चेहरे को छिपाना चाहते हैं।

जैसाकि ईरान के विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासेमी ने यूरोपीय परिषद के ईरान विरोधी प्रतिबंध की प्रतिक्रिया में कहा कि यूरोपीय संघ ने दर्शा दिया है कि उसके अंदर ईरान में मानवाधिकार की सही स्थिति समझने की क्षमता नहीं है और उसने पूर्णरूप से राजनीतिक व्यवहार के कारण ईरानी नागरिकों के अधिकारों से संबंधित वास्तविकताओं से आंखें मूंद ली है। MM

 

Apr १२, २०१७ २०:५० Asia/Kolkata
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