अमेरिकी अधिकारियों के क्रिया कलाप इस बात के सूचक हैं कि वे ईरानी राष्ट्र के विरुद्ध शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियों से बाज़ नहीं आयेंगे।

हालिया कुछ दिनों के दौरान वाइट हाउस के अधिकारियों ने ईरान विरोधी नई गतिविधियां आरंभ कर दी हैं। परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद ईरान के शांतिपूर्ण कार्यक्रम के विरुद्ध अमेरिका द्वारा निराधार दावे करने का बहाना समाप्त हो गया परंतु उसके बाद अमेरिकी अधिकारियों के क्रिया कलाप इस बात के सूचक हैं कि वे ईरानी राष्ट्र के विरुद्ध शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियों से बाज़ नहीं आयेंगे।

अमेरिका के रक्षामंत्री जेम्स मैटिस ने सऊदी अरब की अपनी यात्रा के दौरान निराधार दावा करते हुए ईरान पर क्षेत्र में अशांति उत्पन्न करने का आरोप लगाया। साथ ही अमेरिकी विदेशमंत्री रेक्स टेलरसन ने भी कहा है कि परमाणु हथियारों को प्राप्त करने से रोकने हेतु ईरान के साथ होना वाला परमाणु समझौता विफल हो गया है।

उन्होंने कहा कि इस समझौते से ईरान द्वारा परमाणु हथियारों की प्राप्ति विलंबित हो गयी है। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता अतीत की विफल नीति का प्रतीक है जिसके कारण हमें उत्तर कोरिया की खतरनाक स्थिति का सामना है।

यह बयान ऐसी स्थिति में सामने आ रहा है जब रेक्स टेलरसन ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के प्रमुख पॉल रॉयन के नाम एक पत्र में कहा है कि ईरान परमाणु समझौतों में अपने समस्त वचनों के प्रति कटिबद्ध रहा है और वाइट हाउस ने प्रतिबंधों के स्थगन की अवधि को 90 दिनों के लिए और बढ़ा दिया है।

ईरान के विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ ने रेक्स टेलरसन के बयान की प्रतिक्रिया में कहा है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर निराधार आरोप लगाये जाने से वाशिंग्टन की इस स्वीकारोक्ति को नहीं छिपाया जा सकता कि ईरान परमाणु वचनों के पालन के प्रति कटिबद्ध रहा है। ईरान के विदेशमंत्री ने ट्वीट किया है कि अमेरिका का दायित्व है कि वह अपने रास्ते को परिवर्तित और अपने वचनों का पालन करे।

परमाणु समझौता ईरान और अमेरिका के मध्य होने वाला द्वपक्षीय समझौता नहीं है बल्कि वह बहु पक्षीय समझौता है और सुरक्षा परिषद और विश्व समुदाय ने उसकी पुष्टि की है और उसके संबंध में समस्त पक्षों की संयुक्त ज़िम्मेदारी है। MM

 

Apr २०, २०१७ २०:५९ Asia/Kolkata
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