• जनरल क़ासिम सुलैमानी के मुक़ाबले में राहिल शरीफ़ को लाने की साज़िश

आले सऊद यमन में अपनी पराजय के बाद इस सोच में पड़ गया कि जनरल क़ासिम सुलैमानी की लोकप्रियता को जो कमज़ोरों की आशा बन चुके हैं, कैसे समाप्त किया जाए।

 

इस शैतानी लक्ष्य के लिए आले सऊद ने पाकिस्तानी सेना के पूर्व प्रमुख जनरल राहिल शरीफ़ को प्रयोग करने का सोचा और एक शैतानी चाल के माध्यम से मुसलमानों को आमने सामने खड़ा कर दिया और राहिल शरीफ़ को क़ासिम सुलैमानी के मुक़ाबले के दृष्टिगत सऊदी गठबंधन के नेतृत्व के लिए तैयार किया।

जनरल राहिल शरीफ़ का चयन, सऊदी अरब और उसके घटकों की मजबूरी थी क्योंकि उनको एक ऐसे सैन्य नेतृत्व की आवश्यकता था जो अनुभवी हो। सऊदी अधिकारियों की योजनाएं बहुत बचकाना और साधारण थी, सऊदी गठबंधन की लोकप्रियता यमन में जनसंहार और आतंकवाद के विरुद्ध स्पष्ट नीति के न होने के कारण बहुत कम थी किन्तु वह एक अनुभवी सेना प्रमुख को नेतृत्व की बागडोर सौंपने में सफल हो गये थे और अपनी ग़लतियों को विभिन्न मीडिया सूत्रों के माध्यम से छिपा भी सकते थे और दूसरी ओर मीडिया ट्राएल के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से जनरल सुलैमानी की लोकप्रियता को भी नुक़सान पहुंचाने के प्रयास में था।

शायद यही कारण था कि सऊदी अरब ने राहिल शरीफ़ को प्राप्त करने के लिए पाकिस्तान सरकार को सुन्हरे सपने दिखाएं हैं, कभी डालर के माध्यम से तो कभी धमाका कर और कभी नर्मी से, लेकिन पाकिस्तान सरकार के सऊदी अरब से समझौते के बाद जनरल राहिल शरीफ़ की लोकप्रियता का पारा नीचे आता गया और सऊदी अरब को राहिल शरीफ़ को चैंपियन बनाने का सपना चकनाचूर हो गया। (AK)

विचारः मुहम्मद कुमैली

लेखक के विचारों से पार्स टूडे का सहमत होना आवश्यक नहीं है।

 

 

Jun १८, २०१७ १६:५१ Asia/Kolkata
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