अमरीका की ओर से जेसीपीओए का उल्लंघन

ईरानी विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने 16 जुलाई को सीएनएन से इंटर्व्यू में इस बात का उल्लेख करते हुए कि अमरीकी सरकार ने परमाणु समझौते जेसीपीओए का उल्लंघन किया है, कहा कि ईरान ने जेसीपीओए से जुड़े अपने सभी वचनों का पालन किया है जिसकी अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए ने भी पुष्टि की है लेकिन अमरीका के संबंध में इस तरह नहीं कहा जा सकता क्योंकि अमरीका ने अपने वचनों का पालन नहीं किया है।

जेसीपीओए की व्यापक समीक्षा से यह पता चलता है कि इस समझौते का अच्छा या बुरा अंजाम सामने वाले पक्ष की नियत और उन उसूलों पर अमल करने पर निर्भर है जिस पर अमल करने का सामने वाले पक्ष ने वचन दिया है।

जेसीपीओए में ईरान को जो वचन दिए गए हैं, उनकी अनदेखी ही इस संबंध में आपसी सहयोग के ख़तरे में पड़ने का कारण बनेगी।

जेसीपीओए की सफलता इस बात पर निर्भर थी यह समझौता कि दुनिया में ईरान के ख़िलाफ़ मौजूद मनोवैज्ञानिक माहौल को शांत और इसी प्रकार ईरान के ख़िलाफ़ पाबंदियों को ख़त्म कराए। लेकिन अमरीका ने ऐसा रास्ता अपनाया है जिससे यह शांत माहौल ख़राब हो रहा है और ईरान के ख़िलाफ़ नई पाबंदियां लगाने का यह नतीजा निकलेगा कि जेसीपीओए के बाद फिर एक बार अविश्वास का माहौल पैदा होगा।

राजनीति की दुनिया में पारस्परिक क्रिया एक तार्किक चीज़ है लेकिन इसके साथ ही एक और उसूल है जो कहता है कि पारस्परिक क्रिया एकतरफ़ा सड़क नहीं है जिसे अकेले तय किया जाए। इस्लामी गणतंत्र ईरान ने अब तक जेसीपीओए के संबंध में सार्थक कार्यवाहियां की हैं और इन कार्यवाहियों में मज़बूती सामने वाले पक्ष की ओर से की गयी कार्यवाही पर निर्भर है। सच्चाई यह है कि अगर जेसीपीओए के बाद पैदा हुए शांत माहौल को ख़राब करने की प्रक्रिया न रुकी तो देर या सवेर जेसीपीओए भी इससे प्रभावित होगा, क्योंकि एक समझौता सिर्फ़ उसी वक़्त सफल होता है जब सभी पक्षों का भला हो। (MAQ/N)

 

Jul १७, २०१७ १८:०७ Asia/Kolkata
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