Mar २०, २०१६ १६:३५ Asia/Kolkata
  • ईरान में ईदे नौरोज़ का रंगारंग त्योहार

आज ईरान सहित दुनिया के नौ देशों में ईदे नौरोज़ का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

बसंत नये हिजरी शम्सी वर्ष का पहला दिन है जिसे 21 मार्च या बीस मार्च को ईरान सहित कई देशों में नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है।

नौरोज़ ईरान में सबसे ख़ुशी और धूमधाम से मनाया जाने वाला त्यौहार है।

नौरोज का इतिहास हज़ारों वर्ष पुराना है। भारत,पाकिस्तान और अन्य देशों की भांति ईरान में भी चार मौसम होते हैं। गर्मी, ठंडक, बरसात और बसंत। बसंत के मौसम में जहां किसी क्षेत्र में फ़सलें पक जाती हैं वहीं दूसरे क्षेत्रों में नई फ़सल की ख़ुशी रहती है। पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फ़ गिरने के बाद गेहूं बोया जाता है बसंत आते ही उनमें अंकुर फूट जाते हैं। इस मौसम में पूरा ईरान हर भरा हो जाता है और देश की घाटियां रंग बिरंगे ट्यूलिप के फूलों से भर जाती हैं। चारो ओर हरियाली ही हरियाली होती है और ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे प्रकृति भी नये वर्ष का स्वागत कर रही है।

नववर्ष के आगमन पर ईरानी जनता एक दस्तरख़ान बिछाती है जिसे हफ़्तसीन कहा जाता है। अर्थात फ़ारसी के सीन शब्द से आरंभ होने वाली सात वस्तुओं को इस दस्तरख़ान पर रखा जाता है। सब्ज़ा अर्थात अंकुरित पौधा, सेब, समनू अर्थात गेहूं की कोंपल का हलुआ, सीर अर्थात लहसुन, सिरका, सिक्का तथा सोमाक़। इस दस्तरख़ान पर एक फ़्रेमदार दर्पण भी रखा जाता हे जिसे आकाश का प्रतीक माना जाता है जबकि हरे कांच के पात्र में मोम बत्तियां सजाई जाती हैं जिन्हें अग्नि का प्रतीक माना जाता है। पात्र में गुलाब जल भर कर रखा जाता है यह पानी का प्रतीक है, गोल्ड फिश को पतले कांच के जार में रखा जाता है जो पशु या जीवन का प्रतीक है, अंडे पेंट कर उन पर चित्र बनाये जाते हैं यह इंसानी जीवन एवं परिवार की वृद्धि की शुभ कामना का प्रतीक हैं। ईदे नौरोज़ में लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं और उन्हें ईद की बधाईयां देते हैं और घर आए मेहमान का आदर सत्कार बड़े की धूमधाम से किया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने नौरोज़ को अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित किया है। ईरानी हिजरी शम्सी वर्ष के पहले दिन या 20 और 21 मार्च को ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, ताजेकिस्तान, तुर्कमनिस्तान, इराक़, आज़रबाइजान गणराज्य, अरमीनिया, तुर्की, क़ज़ाक़िस्तान, और उज़बेकिस्तान, पाकिस्तान और भारत में भी नौरोज़ का त्योहार मनाया जाता है। (AK)

टैग्स

कमेंट्स