इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने 39 साल पहले 19 बहमन को इमाम ख़ुमैनी से वायु सेना के उच्चाधिकारियों की एेतिहासिक बैअत या आज्ञापालन के प्रण की वर्षगांठ के अवसर पर वायु सेना के अधिकारियों से मुलाक़ात में इस्लामी क्रांति को एक जीवित वास्तविकता बताया।

उन्होंने इस बात पर बल देते हुए कि आज इस्लामी क्रांति की मज़बूती और सुदृढ़ता उसके आरंभिक दिनों से अधिक है, कहा कि आजके क्रांतिकारी, इस्लामी क्रांति के शुरुआती दिनों के क्रांतिकारियों की तुलना में अधिक डटे रहने वाले, अधिक ज्ञानी और अधिक सचेत हैं और इसी लिए क्रांति अधिक आगे बढ़ी है और परिपूर्ण हुई है।

 

इस्लामी क्रांति 39 साल पहले 22 बहमन वर्ष 1357 हिजरी शमसी बराबर 11 फ़रवरी 1979 को सफल हुई थी और वह विश्व साम्राज्य की ओर से निरंतर दुश्मनी, दबाव और द्वेष के बावजूद अपने आरंभिक सिद्धांतों और उमंगों से कण बराबर भी पीछे नहीं हटी है और पूरे आत्म विश्वास और दृढ़ता के साथ अपने मार्ग पर आगे बढ़ती जा रही है।

 

अमरीका आज इस सच्चाई को अच्छी तरह देख रहा है कि इस्लामी क्रांति और इस्लामी व्यवस्था के रक्षक, पूरे साहस और गौरव के साथ ईरान की सीमाओं के बाहर इराक़ व सीरिया तक में अमरीका, सऊदी अरब व इस्राईल समर्थित आतंकियों के मुक़ाबले में डटे हुए हैं और धार्मिक मान्यताओं की रक्षा कर रहे हैं। यही कारण है कि अमरीका ने प्रतिरोध के मोर्चे को धराशायी करने की हर संभव कोशिश की है लेकिन जैसा कि वरिष्ठ नेता ने कहाः पश्चिम एशिया के क्षेत्र में प्रतिरोध के मामले में हम डटे हुए हैं और हमने कह दिया था कि किसी को भी मनमानी की अनुमति नहीं देंगे। आज पूरी दुनिया के लिए यह बात सिद्ध हो गई है कि अमरीका चाहता था लेकिन नहीं कर सका और हमने चाहा और कर दिखाया।

 

22 बहमन या 11 फ़रवरी के जुलूसों जैसे महान अवसरों पर ईरानी राष्ट्र की वैभवपूर्ण उपस्थिति ईरानी राष्ट्र की क्रांतिकारी  भावनाओं के जारी रहने की निशानी है और यह दर्शाती है कि इस्लामी क्रांति की मान्यताएं और उपलब्धियां अमिट हैं। (HN)

Feb ०९, २०१८ १६:३९ Asia/Kolkata
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