ईरान के उप विदेश मंत्री ने इस बात पर बल देते हुए कि इस्लामी गणतंत्र ईरान को अपनी रक्षा का क़ानूनी अधिकार हासिल है, कहा है कि तेहरान को अपनी प्रतिरक्षात्मक और क्षेत्रीय नीतियों को बयान करने में किसी भी तरह की हिचक नहीं है।

सैयद अब्बास इराक़ची ने ईरान के साथ प्रतिरक्षा व क्षेत्रीय मामलों में वार्ता का द्वार खोलने के लिए कुछ पश्चिमी देशों की ओर से डाले जा रहे दबाव के बारे में कहा कि ईरान इस समय किसी भी विषय पर अमरीका या यूरोप वालों से किसी भी तरह की बात नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी किसी भी मुलाक़ात में सीरिया के बारे में ईरान की नीति जानना चाहेगा तो उसे विस्तार से बताया जाएगा क्योंकि सीरियाई राष्ट्र और सीरिया की संप्रभुता के समर्थन के बारे में ईरान की नीतियां पूरी तरह से स्पष्ट हैं।

 

पश्चिमी एशिया के संवेदनशील और रणनैतिक क्षेत्र के बारे में इस्लामी गणतंत्र ईरान की स्वाधीन नीतियों ने शांति व सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य में होने के साथ ही क्षेत्र से बाहर की शक्तियों के समीकरणों को बिगाड़ दिया है। क्षेत्रीय घटनाओं में ईरान की सार्थक व प्रभावी उपस्थिति ने मध्यपूर्व के क्षेत्र में अमरीका व उसके घटकों के अवैध हितों की पूर्ति की राह में बाधाएं डाल दी हैं। इन परिस्थितियों में अमरीका व उसके पिछलग्गू देश, क्षेत्र में ईरान की सकारात्मक भूमिका को नकारात्मक दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी लिए वे ईरान की मीज़ाइल क्षमता को ख़तरा बता कर वार्ता का नया दरवाज़ा खोलना चाहते हैं ताकि ईरान की क्षेत्रीय नीतियों और प्रतिरक्षा क्षमता को प्रभावित कर सकें।

 

स्वाधीनता, इस्लामी क्रांति का सबसे अहम और मुख्य आयाम है और आज ईरान  की शक्ति, इसी स्वाधीनता के कारण है। ईरान से अमरीका की दुश्मनी का मुख्य कारण यही है कि तेहरान किसी पर निर्भर नहीं है। इसी लिए अमरीका ने अपनी सुरक्षा रणनीति में खुल कर ईरान को क्षेत्र में अपने हितों की राह में एक बड़ी रुकावट बताया है। उसकी कोशिश है कि प्रचारिक और राजनैतिक ड्रामों और हो हल्लों के माध्यम से ईरान की स्वाधीन नीतियों को, जो क्षेत्र की शांति व सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य में हैं, प्रभावित कर दे जबकि एेसा कभी भी होने वाला नहीं है। (HN)

Feb ०९, २०१८ १९:३३ Asia/Kolkata
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