• लंदन में ईरानी दूतावास पर हमला करने वाला शीराज़ी गुट कौन है? वहाबी गुट और इस गुट में क्या है समानता

लंदन स्थित ईरानी दूतावास पर शीराज़ी गुट के हमले के बाद, अधिकांश लोग इस गुट के बारे में जानना चाहते हैं कि यह कौन लोग हैं और इन्होंने ईरानी दूतावास को क्यों निशाना बनाया?

इस गुट के सदस्यों का कहना है कि ईरान के पवित्र नगर क़ुम में शिया धर्मगुरू सादिक़ शीराज़ी के बेटे हुसैन शीराज़ी की गिरफ़्तारी के विरोध में यह हमला किया गया है।

शीराज़ी गुट की पहचान, मुसलमानों के बीच एकता और एकजुटता का विरोध करने, सुन्नी मुसलमानों के ख़लीफ़ाओं को बुरा भला कहने और इमाम हुसैन के ग़म में ख़ूनी मातम पर बल देने के रूप में है।

सूत्रों के मुताबिक़, इस गुट को ब्रिटेन समेत कुछ यूरोपीय देशों और फ़ार्स की खाड़ी के कुछ अरब देशों का समर्थन हासिल है, ताकि शिया मुसलमानों के बीच फूट डाली जा सके।

इस गुट की गतिविधियों पर नज़र रखने वालों का मानना है कि शिया मुसलमानों के बीच इस गुट की भूमिका वही है, जो सुन्नी मुसलमानों के बीच वहाबी या तकफ़ीरी गुट की है।

हुसैन शीराज़ी

शीराज़ी गुट के कई टीवी चैनल हैं, जिनमें से अधिकांश के कार्यलाय लंदन में हैं और यह कई भाषाओं में अपने विचारों का प्रचार प्रसार करते हैं।

इस गुट के तार इस्राईली और पश्चिमी जासूसी एजेंसियों से जुड़े हुए हैं और यह गुट इराक़ और कुवैत में अधिक सक्रिय है।

2014 में भारत में बीजेपी की सरकार के गठन के बाद, इस गुट ने इस देश में भी अपनी गतिविधियों में वृद्धि कर दी है।

शीराज़ी गुट ईरान की इस्लामी व्यवस्था और उसके वरिष्ठ नेता से दुश्मनी के लिए पहचाना जाता है। इसका मूल कारण यह बताया जाता है कि इस्लामी व्यवस्था के मूल सिद्धांतों में से एक दुनिया भर के मुसलमानों के बीच एकता और भाईचारे के लिए प्रयास करना है और यह गुट मुसलमानों की एकता का मुखर विरोधी है।

शीराज़ी गुट के सदस्यों का प्रयास होता है कि मोहर्रम में इमाम हुसैन (अ) की अज़ादारी को कुछ इस प्रकार से मनाएं कि शिया मुसलमानों की पहचान दुनिया में कट्टरवादी एवं ख़ुंख़ार लोगों के रूप में बने। msm

 

Mar १२, २०१८ १९:३४ Asia/Kolkata
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