• ईरान का परमाणु समझौता ट्रम्प ने तोड़ा

तवायफ़ों, वेश्याओं और पोर्न फ़िल्मों की हिरोइनों से संबंध रखने और लाखों डालर फ़ीस अदा करने वाले अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प को इस समय अपने देश में जितनी समस्याओं का सामना है उतना किसी भी अमरीकी राष्ट्रपति को कभी नहीं रहा।

वैसे बिल क्लिंटन और मोनिका लेविन्स्की के शारीरिक संबंधों की वजह से काफ़ी हंगामा हुआ था लेकिन बिल क्लिंटन का कोई कुछ बिगाड़ नहीं पाया था। यह भी संभव है कि ट्रम्प का भी कोई कुछ न बिगाड़ पाए क्योंकि अमरीका में इस प्रकार के यौन संबंध आम हैं। यौन कर्मियों से शारीरिक संबंध बनाना ग़ैर क़ानूनी नहीं है और पोर्न फ़िल्मों की शूटिंग की अनुमति क़ानूनी रूप से वहां के फ़िल्म निर्माताओं को हासिल है। केवल राजनेताओं के लिए वहां बुरा समझा जाता है कि वह दुराचार करते फिरें।

उधर राष्ट्रपति ट्रम्प की पूरी कोशिश है कि अमरीका के इस्लाम दुशमन तत्वों की निगाह में उनकी तसवीर एक कट्टर इस्लाम दुशमन की रही है। इसीलिए वह मुसलमानों के ख़िलाफ़ बयान देने और मुसलमानों के अमरीका में प्रवेश को रुकवाने में कोई विलंद नहीं करते। अपनी इसी दुर्भावना के तहत ट्रम्प ने बहुत ही विवादित फ़ैसला करते हुए उस अंतर्राष्ट्रीय समझौते को समाप्त कर दिया जिस पर अमरीका ने अपनी ख़ुशी से हस्ताक्षर किए थे।

ज्ञात रहे कि संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों अर्थात अमरीका, ब्रिटेन, रूस, चीन औज्ञ फ़्रांस के साथ जर्मनी ने मिलकर यूरोपीय संघ की कोशिशों से ईरान को परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर तैयार करने के लिए 2015 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि उस समय भी इस्राईल की ओर से भारी दबाव डाला जा रहा था कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार का परमाणु समझौता न किया जाए, मगर यूरोपीय सकरारों के संकल्प के सामने इस्राईल की एक न चली और बाराक ओबामा के विदेश मंत्री जान कैरी ने हस्ताक्षर सहित सभी देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। कहा जाता है कि उस समय अमरीकियों को लगता था कि ईरान समझौते का पालन नहीं कर पाएगा और इस समझौते को बहाना बनाकर वह ईरान के परमाणु केन्द्रों को तबाह कर देंगे। लेकिन तीन साल गुज़ार जाने के बावजूद एसा हुआ नहीं। हालांकि अभी कुछ दिन पहले इस्राईल के प्रधानमंत्री नेतनयाहू ने एक संवाददाता सम्मेलन में झूठ का पुलिंदा पेश करके यह बताने की कोशिश की थी कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम जारी है मगर समझौते में शामिल किसी भी देश ने नेतनयाहू के झूठ को सच नहीं माना अलबत्ता ज़ायोनी दामाद के सुसर डोनल्ड ट्रम्प ने इसका बिल्कुल सच मान लिया और ईरान के साथ किए गए परमाणु समझौते की धज्जियां उठा कर रख दीं। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि ईरान पर इस समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाने वाले ट्रम्प की ओर से अपने चुनावी अभियान के दौरान भी कहा जा रहा था कि ईरान के साथ जो समझौता हुआ है वह बहुत ग़लत है और वह इसको अमरीका की पूर्व सरकार की एक खुली ग़लती मानते हैं और राष्ट्रपति बनने के बाद वह इस समझौते को रद्द कर देंगे।

अतः नया बहाना तराशने से बेतहर यह होता कि ट्रम्प कहते कि ईरान ने कोई उल्लंघ नहीं किया है मगर मैं इसके विरुद्ध हूं इस लिए अमरीका इस समझौते से बाहर निकल रहा है।

यहां पर यह बताना ज़रूरी है कि वर्तमान अमरीकी राष्ट्रपति ने इस्राईल प्रेम की सारी सीमाएं पार करते हुए बैतुल मुक़द्दस को इस्राईल की राजधानी मान लिया और अमरीका का दूतावास वहीं स्थानान्तरित करने का फ़ैसला करके सारी दुनिया के मुसलमानों पर भरपूर वार किया है तो अब उनकी निगाहें ईरान पर टिकी हुई हैं क्योंकि ईरान ही एक एसा मुस्लिम देश भे जो इस्राईल को आंख दिखाने क हिम्मत रखता है।

असल में परमाणु समझौते से अलग होकर और ईरान पर नए प्रतिबंध लगवाकर अमरीका ईरान को आर्थिक दुर्दश के दौर में झोंकना चाहता है। ट्रम्प ने अपने भाषण में ईरान की लोकतांत्रिक सरकार को हटाकर एक नई बादशाहत स्थापित करने का जो इशारा दिया है उस से ही पता चलता है कि सारी दुनिया से लड़ूं लड़ूं करते फिर रहे ट्रम्प के दिल में क्या है।

उत्तरी कोरिया की नई नीतियों से मात खाने के बाद अब ट्रम्प को अपना जुनून पूरा करने के लिए किसी देश की ज़रूरत है और उसके लिए ईरान से बेहतर निशाना कोई नहीं है।

शकील शम्सी

भारत के वरिष्ठ टीकाकार  

मई १०, २०१८ १५:२६ Asia/Kolkata
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