मई ३१, २०१८ ०९:२१ Asia/Kolkata
  • फारसी कविता को, पवित्र, बुद्धिमत्तापूर्ण और आशाजनक बनाए रखने की कोशिश करें, वरिष्ठ नेता

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने पूरे इतिहास में फारसी कविता को, "पवित्रता व लज्जा " से संपन्न कविता बताया और बल दिया कि यह कोशिश की जाए कि यह पवित्र और शर्म, फारसी कविता में हमेशा बाक़ी रहे।

पैगम्बरे इस्लाम के पौत्र इमाम हसन अलैहिस्लाम के जन्मदिवस की पूर्व रात्रि में ईरान के कुछ साहित्यकारों और फारसी कवियों ने वरिष्ठ नेता से भेंट की। 

इस भेंट में  इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने , न्याय, इस्लामी प्रतिरोध, और नैतिकता जैसे मुद्दों पर आंदोलन चलाने और चर्चा आरंभ करने को कवियों का एक कर्तव्य बताया और कहा कि फारसी कविता हमेशा, बुद्धिमत्ता, नैतिकता से भरपूर रही और विचारों में गहरायी और आशा पैदा करने में प्रभावी रही है। 

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने इस ओर भी संकेत किया कि फारसी कविता को, उसकी राह से हटाने का प्रयास किया जा रहा है और उसे निम्नस्तरीय विचारों, राजनीतिक बिखराव और शत्रु से मुकाबले से लापरवाही जैसै विषयों से भरने की कोशिश की जा रही है इस लिए इस प्रकार की कोशिशों के मुक़बले में , फारसी कविता में, बुद्धिमत्ता, गंभीरता, कर्तव्यपरायणता, गहराई से चिंतन , मज़बूत पहचान और दुश्मन के सामने संघर्ष जैसे विषयों को अधिक उठाया जाना चाहिए। 

वरिष्ठ नेता ने इसी प्रकार अच्छे तराने को सामाजिक आंदोलनों के लिए अत्याधिक प्रभावशाली बताया और कहा कि कविता में जनता की रुचि को देखते हुए इस साधन को समाज के लिए आवश्यक विषयों पर ध्यान आकृष्ट करने के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए। (Q.A.)

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