Aug २७, २०१८ १८:५३ Asia/Kolkata
  • ईरान ने अमरीका को राष्ट्र संघ के सर्वोच्च न्यायालय में घेरा, घटकों से दूर हो रहे अमरीका के लिए कठिन है यह लड़ाई

इस्लामी गणतंत्र ईरा ने संयुक्त राष्ट्र संघ के हेग स्थित सर्वोच्च न्यायालय में अमरीका के ख़िलाफ़ मुक़द्दमा दायर कर दिया है।

यह मुक़द्दमा परमाणु समझौते से बाहर निकलने के अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के फ़ैसले के बाद ईरान पर पुनः लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ दायर किया गया है। ईरान ने इसे खुला आर्थिक हमला क़रार दिया है।

ईरान ने यह मुक़द्दमा वैसे तो जुलाई में ही दायर कर दिया था और कहा था कि ट्रम्प प्रशासन ने जो प्रतिबंध लगाए हैं वह आज मार्च 1955 को ईरान और अमरीका के बीच हुए समझौते का उल्लंघन है। इस मुक़द्दमे की सुनवाई सोमवार 27 अगस्त को हुई है। संयुक्त राष्ट्र संघ के सर्वोच्च न्यायालय के जजों से ईरान ने मांग की है कि वह अमरीका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को तत्काल निरस्त करें ताकि ईरानियों के राष्ट्रीय हितों की रक्षा की जा सके। अदालत में ईरान के वकील मोहसिन मुहिब्बी ने कहा कि प्रतिबंध पुनः लगाने का अमरीका का फ़ैसला 1955 के समझौते का खुला उल्लंघन है क्योंकि इस फ़ैसले से ईरान की अर्थ व्यवस्था को गंभीर रूप से नुक़सान पहुंचाने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि ईरान वर्ष 2015 में हुए परमाणु समझौते का पूरी तरह पालन कर रहा है अतः ईरान पर पुनः प्रतिबंध लगाने का कोई औचित्य नहीं हो सकता। अमरीका के वकीलों की ओर से मंगलवार को अपना पक्ष रखा जाएगा।

ईरान ने जिस समझौते के आधार पर संयुक्त राष्ट्र संघ के सर्वोच्च न्यायालय में मुक़द्दमा दायर किया है वह अमरीका और ब्रिटेन की साज़िश से वर्ष 1953 में ईरान में डाक्टर मुसद्दिक़ की सरकार के विरुद्ध कराए गए विद्रोह के दो साल बाद हुआ था। इस समझौते पर अमरीका और ईरान ने हस्ताक्षर किए थे।

इस्लामी गणतंत्र ईरान ने अमरीका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों का मुक़ाबला करने के लिए कई आयामों से अपने प्रयास तेज़ किए हैं। जहां ईरान एक ओर अपनी अर्थ व्यवस्था को आत्म निर्भर बनाने और तेल की आय से निर्भरता ख़त्म करने की नीति पर काम कर रहा है वहीं उसने अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनी संस्थाओं में भी अपना पक्ष मज़बूती से रखने का फ़ैसला किया है। संयुक्त राष्ट्र संघ के सर्वोच्च न्यायालय में अमरीका को घसीटना भी ईरान की इसी रणनीति का एक हिस्सा है।

हालात एसे हैं कि इस समय अमरीका के घटक देश भी या तो ईरान का साथ देने की बात कर रहे हैं या कम से कम अमरीका से अपनी दूरी बनाने पर ज़ोर दे रहे हैं। जर्मनी के विदेश मंत्री ने तो खुलकर यह बात कही है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यूरोप एक नया वित्तीय नेटवर्क तैयार करे जो अमरीकी प्रभाव से मुक्त हो ताकि अमरीकी प्रतिबंधों पर अमल करने की यूरोप के सामने कोई मजबूरी न रह जाए।

इस समय जब अमरीका को अपने घटकों की ओर से भी कठोर संदेश मिल रहे हैं तो ईरान से उसकी लड़ाई और भी कठिन हो गई है। टीकाकार तो यह कहने लगे हैं कि ट्रम्प प्रशासन ने एक साथ कई मोर्चे खोल लिए हैं अतः जहां वह एक तरफ़ ईरान से भिड़ा हुआ है वहीं दूसरी ओर उत्तरी कोरिया, चीन, रूस, यहां तक कि यूरोप और कैनेडा से भी उसकी ठनी हुई है। आस्ट्रेलिया जैसे घटक देशों से भी ट्रम्प प्रशासन के रिश्ते काफ़ी ख़राब हो चुके हैं।

ईरान जो अब तक उस अमरीका को टक्कर देता आया है जो अपने सभी घटकों के साथ ईरान पर चौतरफ़ा हमला करता था तो अब यह निश्चित है कि अकेले पड़ते जा रहे अमरीका से निपटना ईरान के लिए ज़्यादा कठिन नहीं होगा।

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