किसी भी देश की मिसाइल क्षमता, उसकी रक्षा ज़रूरत का हिस्सा होती है और किसी भी प्रकार से अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन नहीं है।

ईरान की मिसाइल क्षमता, इस समय, इस देश की शक्ति का आधार बन चुकी है और यही वजह है कि अब ईरान क्षेत्र को अशांत करने वाले किसी भी तत्व का मुकाबला कर सकता है लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि कुछ पश्चिमी देश, झूठे दावे करके यह आशा रखे हैं कि ईरान अपनी रक्षा क्षमताओं में वृद्धि न करे। इस संदर्भ में फ्रांस के विदेशमंत्री ने जेसीपीओए की सुरक्षा का दावा करते हुए कहा है कि ईरान को बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम , क्षेत्रीय गतिविधियों और परमाणु कार्यक्रम के  बारे में सन 2025 के बाद वार्ता करना होगी। इस प्रकार के दावे वास्तव में ईरानोफोबिया का ही हिस्सा हैं। इस के साथ ही इस तरह के दावों का दूसरा मक़सद, ईरान की रक्षा शक्ति को कमज़ोर करना है। विदेशमंत्रालय के प्रवक्ता बहराम क़ासेमी ने भी फ्रांस के विदेशमंत्री के दावे पर प्रतिक्रिया प्रकट करते हुए बल दिया कि ईरान का मिसाइल कार्यक्रम, रक्षात्मक, स्वदेशी और देश की सुरक्षा के लिए उठाया जाने वाला क़ानूनी क़दम है और किसी भी दशा में इस विषय पर बात चीत नहीं की जा सकती। 

वास्तव में वर्तमान समय में ईरान एक एेसे क्षेत्र में है जहां चारो ओर असुरक्षा और अशांति है और खतरे की विविधता के दृष्टिगत सुरक्षा की परिभाषा भी बदल गयी है। यही वजह है कि ईरान खतरों के दृष्टिगत , वैज्ञानिक व  स्वदेशी क्षमताओं  के आधार पर अपनी रक्षा क्षमता को बढ़ा रहा है और यह ईरान का कानूनी अधिकार है और उसे इस अधिकार से कोई नहीं रोक सकता।(Q.A.) 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Sep ०१, २०१८ १६:१८ Asia/Kolkata
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