इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने रविवार की सुबह नौशहर के कैडिट काॅलेज के एक कार्यक्रम में साम्राज्यवादी शक्तियों की फूट फैलाने वाली नीतियों का उल्लेख किया और कहा कि साम्राज्यवादी विशेषकर अमरीका अपने हित, गृहयुद्ध आतंकवाद और क्षेत्रीय झड़पों में देखते हैं।

वरिष्ठ नेता ने कहा कि इ्सलामी गणतंत्र ईरान और ईरानी राष्ट्र स्पष्ट शब्दों और बिना किसी संकोच के अत्याचार व साम्राज्य के खिलाफ आवाज़ उठाता है और ईरान की महान जनता से अंतरराष्ट्रीय अत्याचारियों की दुश्मनी की अस्ल वजह यही है। वास्तव में पिछली एक सदी के अनुभवों से यही पता चलता है कि किसी भी क्षेत्र की जनता और देशों के मध्य फूट डालना और उन्हें एक दूसरे लड़ाना, अमरीकी नीतियों का मुख्य हिस्सा रहा है। इस तरह से अमरीकी सरकार, विभिन्न क्षेत्रों में सैन्य हस्तक्षेप और अपना प्रभाव बढ़ाने की भूमिका तैयार करती है। इस लिए हर क्षेत्र के हर देश के लिए सब से पहली और सब से महत्वपूर्ण ज़रूरत अपनी रक्षा व्यवस्था को मज़बूत बनाना है। रविवार के दिन इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता की ओर से सशस्त्र सेना को मज़बूत बनाने पर बल दिया जाना वास्तव में दुश्मनों की ओर से बढ़ते खतरों के दृष्टिगत है। तार्किक दृष्टि से भी यदि कोई एेसा देश हो जिसके आस पास शांति न हो तो उसे अपनी रक्षा शक्ति में वृद्धि की ज़रूरत होती है। इस्लामी गणतंत्र ईरान की रक्षा क्षमताओं ने ज़रूरत पड़ने पर अतिक्रमणकारियों और क्षेत्र पर धावा बोलने वाली शक्तियों को यहदिखा दिया है कि उसमें अपनी रक्षा की शक्ति है । वरिष्ठ नेता ने भी इसी लिए अपने बयान में कहा कि इ्सलामी गणतंत्र ईरान और ईरानी जनता ने अमरीका के सामने डट कर यह साबित कर दिया है कि अगर कोई राष्ट्र वर्चस्वादियों की धमकियों से न डरे और अपनी क्षमताओं पर भरोसा करे तो महाशक्तियों को भी पीछे हटने पर विवश होना पड़ता है। वरिष्ठ नेता ने सीरिया, इराक़ और लेबनान का क्षेत्र में अमरीकी षडयंत्रों की विफलता के उदाहरण के रूप में उल्लेख किया (Q.A.)

 

 

 

 

Sep ०९, २०१८ १७:५२ Asia/Kolkata
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