• ट्रम्प, सुरक्षा परिषद, ईरान की तैयारी

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प सुरक्षा परिषद के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में इस पद का दुरुपयोग करते हुए विश्व जनमत विशेष रूप से अमरीकी जनता का ध्यान अपने स्कैंडलों हटाने के लिए जान लगाए हुए हैं।

निश्चित रूप से यदि ईरान के राष्ट्रपति सुरक्षा परिषद में जाते हैं और ट्रम्प से उनका सामना होता है और वह आरोपों का जवाब देते हैं तब भी इससे ट्रम्प को अपनी वर्तमान संकटमय स्थिति से बाहर निकलने में मदद मिल जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीका की राजदूत निकी हेली ने कहा कि अमरीका के राष्ट्रपति का इरादा है कि सितम्बर महीने में सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता उन्हीं के शब्दों में ईरान की ओर से अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों के हनने के मुद्दे पर अपने हाथ में लेंगे। ट्रम्प के सुरक्षा परिषद में जाने का उद्देश्य यह है कि दुनिया के देशों को ईरान के ख़िलाफ़ अधिक कठोर रुख़ अपनाने के लिए दबाव में लाएं। निकी हेली ने इस संदर्भ में पत्रकारों से कहा कि अमरीका के राष्ट्रपति ईरान की ओर से अंतर्राष्ट्रीय नियमों के हनन की समीक्षा के उद्देश्य से सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता स्वीकार करेंगे।

ट्रम्प के इस इरादे को देखते हुए निम्न लिखित बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिएः

  1. ट्रम्प इस समय सुरक्षा परिषद में जाना चाहते हैं जब वह अमरीका के भीतर गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। ट्रम्प के सिर पर महाभियोग का ख़तरा मंडरा रहा है। हालत यह है कि रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं के बीच भी ट्रम्प की पोज़ीशन काफ़ी ख़राब है।
  2. अमरीका के बाहर ट्रम्प की छवि अंतर्राष्ट्रीय संधियों और क़ानूनों का खुलकर हनन करने वाले नेता की है जो किसी भी नियम पर कटिबद्ध नहीं है। ट्रम्प ईरान के परमाणु समझौते से एकपक्षीय रूप से निकल गए और उन्होंने ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए हालांकि यह बात सारे देश मानते हैं और आईएईए ने भी इसकी पुष्टि की है कि ईरान पूरी तरह परमाणु समझौते का पालन कर रहा है।
  3. अमरीका में कांग्रेस के चुनाव को लगभग दो महीने का समय बाक़ी है। ट्रम्प को भारी आलोचनाओं का सामना है। पूर्व राष्ट्रपति बाराक ओबामा भी ट्रम्प के ख़िलाफ़ मैदान में उतर पड़े हैं। इन हालात में ट्रम्प की कोशिश होगी कि लोग उनके बारे में अपना विचार बदलें और उनकी छवि में सुधार हो जाए।
  4. ट्रम्प के पास एक हथकंडा यह है कि वह सुरक्षा परिषद में जाएं और ईरान के ख़िलाफ़ अपने निराधार दावों को दोहराएं।
  5. जो कुछ सुरक्षा परिषद की इस बैठक में होने जा रहा है वह ईरान के लिए महत्वपूर्ण है और हमें ट्रम्प के निराधार आरोपों का जवाब देना चाहिए और उन्हें निरुत्तर कर देना चाहिए। यह काम संयुक्त राष्ट्र संघ में ईरान के राजदूत कर सकते हैं किसी और वरिष्ठ अधिकारी के सुरक्षा परिषद में जाने की ज़रूरत नहीं है। इस बीच रूस, चीन और यूरोपीय देशों से यह मांग की जा सकती है कि वह बहस में शामिल हों और अमरीका का जवाब दें। जिन देशों ने परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं एसे अवसरों पर उन्हें चाहिए कि सामने आएं और ट्रम्प से पूछें कि वह परमाणु समझौते से बाहर क्यों निकले और समझौते को पारित करने वाले सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का उन्होंने उल्लंघन क्यों किया।
  6. ईरान के सुप्रीम लीडर ने दो टूक अंदाज़ में कह दिया है कि अमरीका से कोई भी वार्ता नहीं होनी है। ईरान के राष्ट्रपति तथा अन्य अधिकारी अमरीका की ओर से बार बार वार्ता के अनुरोध को ठुकरा चुके हैं। राष्ट्रपति रूहानी ने कहा था कि वार्ता का पीठ जिसने दिखाई वह अमरीका है, प्रतिबंधों के साथ साथ वार्ता का कोई अर्थ नहीं है। इस तरह यह बात साफ़ है कि अमरीका से वार्ता न करने पर सभी एकमत हैं।

इसके साथ ही साथ इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के अधिवेशन में भाग लेने के लिए ईरान का शिष्ट मंडल न्यूयार्क जाएगा तो उस समय अमरीकी राष्ट्रपति वर्तमान संकट से बाहर निकलने के लिए इसको प्रयोग न कर पाएं। हमें यह याद रखना होगा कि यदि अमरीका में चुनाव के समय हम थोड़ी सी भी नर्मी दिखाएंगे तो इसका केवल यही परिणाम होगा कि ट्रम्प के सहयोगियों को चुनावी फ़ायदा होगा। इसलिए बहुत ज़रूरी है कि अमरीका के प्रचारिक हथकंडों से निपटने के लिए आवश्यक तैयारी कर ली जाए।

 

मोहसिन पाकआईन

(लेखक ईरान के पूर्व कूटनयिक हैं)

Sep १०, २०१८ २०:२५ Asia/Kolkata
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