• काबुल में ईरान, भारत और अफ़ग़ानिस्तान के उप विदेश मंत्रियों की बैठक

ईरान के उप विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास इराक़ची ने मंगलवार को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल की अपनी यात्रा के दौरान कहा है कि तेहरान आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में काबुल के साथ सहयोग जारी रखेगा।

अफ़ग़ान सरकार के चीफ़ एक्ज़ेक्यूटिव अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह से मुलाक़ात में इराक़ची ने कहा, आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में तेहरान, काबुल के साथ व्यापक सहयोग जारी रखेगा और इसके लिए अफ़ग़ान सरकार एवं जनता की जो भी मांग होगी उसका भरपूर समर्थन किया जाएगा।

ईरानी उप विदेश मंत्री ने इसी प्रकार, काबुल में ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और भारत के उप विदेश मंत्रियों की संयुक्त बैठक में भाग लिया। इस बैठक में ईरानी उप विदेश मंत्री अब्बास इराक़ची, भारत के उप विदेश मंत्री विजय गोखले औऱ अफ़ग़ान उप विदेश मंत्री हिकमत ख़लील करज़ई ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई समेत विभिन्न विषयों पर विचार विमर्श किया।

इराक़ची ने इस बैठक में एलान किया कि ईरान, अफ़ग़ानिस्तान की सुरक्षा को अपनी सुरक्षा मानता है और आतंकवाद एवं दाइश के ख़िलाफ़ लड़ाई में अधिक सहयोग करना चाहता है।

तीनों देशों के उच्च अधिकारियों ने परिवहन, चाबहार बंदरगाह, खनिजों से लाभ उठाना, निवेश, बैंकिंग सहयोग और साझा व्यापार जैसे विषयों पर भी चर्चा की।

काबुल में ईरान, भारत और अफ़ग़ानिस्तान के उच्च अधिकारियों की संयुक्त बैठक से स्पष्ट होता है कि तीनों देश परस्पर सहयोग के नए चरण में प्रवेश कर गए हैं। चाबहार बंदरगाह में ईरान, भारत और अफ़ग़ानिस्तान का सहयोग क्षेत्र में बहु पक्षीय सहयोग का नया प्रतीक बन गया है।

चाबहार बंदरगाह में बड़े जहाज़ लंगर डाल सकते हैं और इसके द्वारा अफ़ग़ानिस्तान समेत मध्य एशिया के डेडलॉक देशों तक पहुंच के लिए यह निकटतम जलमार्ग है। इसके अलावा, रोड नेटवर्क एवं रेल नेटवर्क की दृष्टि से ईरान को इलाक़े में एक विशिष्टता प्राप्त है। इसी वास्तविकता को दोखते हुए अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह ने कहा है कि अफ़ग़ान सरकार दोनों देशों के बीच हुए समस्त समझौतों पर अमल होने में गहरी रूची रखती है। शांति व सुरक्षा के वातावरण में यह सहयोग और भी अधिक हो सकता है। यही कारण है कि तेहरान सरकार अफ़ग़ानिस्तान में शांति व स्थिरता का समर्थन करती है और मादक पदार्थों की तस्करी का मुक़ाबला करने में गंभीर है।

तेहरान और काबुल आतंकवाद, मादक पदार्थ, शरणार्थी और संयुक्त जलीय स्रोत जैसे मुद्दों को परस्पर सहयोग से हल कर सकते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में दोनों देशों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा शांति व स्थिरता की स्थापना में सहयोग में विस्तार है।  

 

Sep १२, २०१८ १८:१९ Asia/Kolkata
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