• अहवाज़ में आतंकी हमले की ज़िम्मेदारी लेने वाले अलअहवाज़ी गुट को पहचानें

अहवाज़ में पवित्र प्रतिरक्षा सप्ताह के आरंभ पर आयोजित होने वाली परेड पर आतंकी हमले के कुछ ही घंटे बाद याक़ूब हुर्र नस्तरी नामक व्यक्ति ने, जो अपने आपको आतंकी गुट अलअहवाज़ी का प्रवक्ता बता रहा था, इस हमले की ज़िम्मेदारी ली। इस गुट के इतिहास पर एक नज़र डालते हैं।

ईरान के सुरक्षा बलों के सटीक क्रियाकलाप की बदौलत अब तक कम ही लोगों ने अलअहवाज़ी गुट का नाम सुना होगा लेकिन ध्यान योग्य बात यह है कि इस गुट की गतिविधियों का अतीत लगभग 40 साल पुराना है। ख़ूज़िस्तान की पृथकता का विचार पहली बार अरब जन सोसाइटी नामक एक गुट ने पेश किया था। इस गुट को पृथकतावादी गुट के रूप में पहचाना जाना था जो ख़ूज़िस्तान प्रांत को ईरान की सीमाओं से अलग करना चाहता थ। इस्लामी क्रांति के आरंभिक काल में शैख़ शब्बीर ख़ाक़ानी के नेतृत्व में यह गुट काम कर रहा था और इसकी कुछ विचित्र मांगें थीं जैसे ख़ूज़िस्तान एक स्वायत्त क्षेत्र हो, यहां अरबी भाषा की अदालतें हों, सरकारी नौकरियों में अरबी भाषियों को प्राथमिकता हो, ख़ूज़िस्तान के सभी स्कूलों की भाषा अरबी हो और इस प्रांत के सभी अधिकारी अरब हों। क्रांति के आरंभिक काल में इस बात की कोशिश की गई कि वार्ता के माध्यम से समस्या का समाधान किया जाए लेकिन इराक़ द्वारा थोपे गए युद्ध के शुरू होते ही इस गुट ने विध्वंसक कार्यवाहियां शुरू कर दीं और कुछ समय बाद इसे सद्दाम का समर्थन हासिल हो गया।

 

इसके बाद इस गुट ने अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए आतंकी हमले और बम धमाके करके ख़ुर्रमशहर के बहुत से लोगों को शहीद कर दिया। इसके बाद ईरान के सुरक्षा बलों ने इस गुट के साथ कड़ाई से निपटना शुरू किया जिसके कारण इस गुट के अधिकतर लोग इराक़, ब्रिटेन और हाॅलैंड फ़रार हो गए। थोपे गए युद्ध के दौरान इस आतंकी गुट के सदस्यों ने ईरान के ख़िलाफ़ जासूसी का काम शुरू कर दिया और इस प्रकार अपने देश के लोगों से विश्वासघात किया। इस गुट ने अब अपना नाम अरब जन सोसाइटी बदल कर अलअहवाज़िया रख लिया है। इस गुट का मानना है कि ग़ैर अरबों ने ख़ूज़िस्तान पर क़ब्ज़ा कर लिया है और उनका क़ब्ज़ा ख़त्म करके इस क्षेत्र को पुनः अरबों के हाथों में दिया जाना चाहिए। इसी लिए यह लोग ख़ूज़िस्तान के आबादान शहर को अरबी में अब्बादान और ख़ुर्रमशहर को मुहम्मरा कहते हैं। उनका कहना है कि ईरानियों ने इन क्षेत्रों के इस्लामी नामों को बदल दिया हैै।

 

यह पृथकतावादी गुट क्रांति की सफलता के कुछ साल बाद ही दब गया था लेकिन सन 2005 से इसने पुनः अपनी गतिविधियां शुरू कर दी हैं। इस गुट ने अपनी गतिविधियां पुनः शुरू करने के बाद मिस्र की राजधानी क़ाहेरा में एक काॅन्फ़्रेंस भी आयोजित की थी जिसमें मिस्र व सऊदी अरब की कई अहम हस्तियों ने भाग लिया था। सन 2015 में इस गुट ने अपना नाम फिर बदला और इस बार इसका नाम अहवाज़ के सुन्नियों की इस्लामी संस्था से बदल कर अलअहवाज़ी आंदोलन रख दिया गया। (HN)

Sep २२, २०१८ २०:०९ Asia/Kolkata
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