वरिष्ठ नेता ने इसी प्रकार अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को ईरानी राष्ट्र के लिए गौरव और साम्राज्यवादियों की अप्रसन्नता का कारण बताया और कहा कि हर क्षेत्र में ईरानी राष्ट्र की सफलता से साम्राज्यवादी क्रोधित होते हैं।

22 सितंबर को ईरान के अहवाज़ नगर में सैनिक पैरेड के दौरान जो आतंकवादी हमला हुआ था उसने एक बार फिर दर्शा दिया कि ईरानी राष्ट्र विकास और गौरव के मार्ग पर अग्रसर है और यह वह चीज़ है जो दुश्मनों को लेशमात्र भी पसंद नहीं है।

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनई ने खेल में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों से भेंट में अहवाज़ में होने वाले आतंकवादी हमले की ओर संकेत किया और कहा कि प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार यह कायर्तापूर्ण कार्य भी उन्हीं लोगों का है जब वे इराक और सीरिया में फंस जाते हैं तो अमेरिकी उन्हें मुक्ति दिलाते हैं और उनके हाथ सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात की जेब में हैं।

वरिष्ठ नेता ने इसी प्रकार अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को ईरानी राष्ट्र के लिए गौरव और साम्राज्यवादियों की अप्रसन्नता का कारण बताया और कहा कि हर क्षेत्र में ईरानी राष्ट्र की सफलता से साम्राज्यवादी क्रोधित होते हैं। इस आधार पर आपकी सफलता वास्तव में ईरानी राष्ट्र की सफलता और ईरान के दुश्मनों की पराजय है।

साम्राज्यवादियों की अतिक्रमणकारी कार्यवाहियों व नीतियों के मुकाबले में प्रतिरोध को इस्लामी गणतंत्र ईरान अपना परमदायित्व समझता है और खेल सहित समस्त क्षेत्रों में इस प्रतिरोध को देखा जा सकता है।

ईरानी खिलाड़ियों ने इस्राईली खिलाड़ियों के साथ खेलने से जो इंकार कर दिया था उसे इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।

वरिष्ठ नेता ने ईरानी खिलाड़ियों के इस साहसिक कार्य की सराहना करते हुए कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान ने क्रांति के आरंभ से दक्षिण अफ्रीका की रंगभेदी और इस्राईल की नस्ल भेदी सरकार को मान्यता नहीं दी थी।

 अलबत्ता दक्षिण अफ्रीका की रंगभेदी सरकार का अंत हो गया और दूसरों के अधिकारों को हड़प लेने वाली, झूठी और जातिवादी जायोनी सरकार का भी अंत हो जायेगा।

सीरिया और इराक में पराजय का कटु स्वाद चखने वाले आतंकवादी और उनके समर्थक यह कल्पना कर रहे हैं कि निर्दोष लोगों की हत्या करके वे ईरान को अपने दृष्टिकोणों से पीछे हटने पर बाध्य कर देंगे जबकि ईरान न तो कभी भी डरा है और न ही अपने सिद्धांतिक दृष्टिकोणों से पीछे हटेगा।

अमेरिका, इस्राईल और उनका समर्थन प्राप्त कुछ अरब देशों की कठपुतली सरकारों को यह वास्तविकता जान लेनी चाहिये कि धमकी देने का समय बीत चुका है और अनुभवों ने दर्शा दिया है कि आतंकवादियों और उनके पश्चिमी एवं अरब समर्थकों के मुकाबले में पीछे हटने का अर्थ उन्हें अवसर देना है और इस बात में कोई संदेह नहीं है कि धमकियों के मुकाबले में साहसिक प्रतिरोध ईरान का अडिग दृष्टिकोण है। MM

 

Sep २५, २०१८ २१:०४ Asia/Kolkata
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