Oct १७, २०१८ १२:४८ Asia/Kolkata
  • ईरान का तेल निर्यात ज़ीरो बैरल तक पहुंचाने का ट्रम्प का सपना चकनाचूर, चाह कर भी कुछ नहीं कर पाए अमरीका और उसके घटक

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने परमाणु समझौते से निकलने के साथ ही कह दिया था कि वह ईरान का तेल निर्यात ज़ीरो बैरल तक पहुंचाना चाहते हैं जबकि एसी तैयारी करेंगे कि तेल की अंतर्राष्ट्रीय मंडियों में तेल सप्लाई में कोई कमी न आने पाए मगर ट्रम्प का यह सपना तब धरा का धरा रह गया जब ईरान की तेल सप्लाई जारी रहने के बावजूद तेल मंडियों में तेल की सप्लाई की कमी है अतः ईरान की तेल सप्लाई रोकने का अमरीका कोई विकल्प नहीं खोज पाया है।

4 नम्बर की तारीख़ ट्रम्प की आख़िरी डेड लाइन थी इस तारीख़ से पहले अमरीका ईरान का तेल निर्यात ज़ीरो बैरल तक पहुंचाना चाहता था। अमरीका ने यह लक्ष्य पाने के लिए पिछले पांच महीनों में हर संभव कोशिश की है उसने प्रलोभन और धमकियों सहित हर रास्ता आज़माया है ताकि दुनिया देश ईरान से तेल ख़रीदना बंद कर दें।

ट्रम्प को ग़लत फ़हमी थी कि वह तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक तथा अन्य तेल निर्यातक देशों की मदद से ईरान की तेल सप्लाई का विकल्प निकाल लेंगे मगर अकतूबर महीना आधे से अधिक गुज़र चुका है और अब तक तेल की सप्लाई की कमी पूरी नहीं की जा सकी है अतः तेल के दाम 80 डालर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गए हैं।

अब अमरीका ने भी ईरान से तेल ख़रीदने वाले देशों को प्रतिबंधों से छूट देने की नीति अपनाई है क्योंकि उसे अंदाज़ा हो गया है कि यह देश ईरान से तेल ख़रीदना बंद नहीं कर सकते।

राष्ट्रपति रूहानी ने भी अपने हालिया इंटरव्यू में कहा कि अमरीका को नवंबर में जो कुछ करना था वह पहले ही कर चुका है अतः यह कहना चाहिए कि नवम्बर में भी अमरीका के हाथ में कुछ नहीं है।

रायटर्ज़ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि ईरान इस समय केवल एशियाई देशों को प्रतिदिन 13 लाख बैरल तेल का निर्यात कर रहा है और इस बात की संभावना नहीं है कि 4 नवम्बर तक इस मात्रा में वैकल्पित तेल सप्लाई का बंदोबस्त किया जा सके।

ईरान के पेट्रोलियम मंत्री बीजन नामदार ज़ंगने ने कहा कि तेल मंडियों में इस समय तेल की सप्लाई की कमी है और इस कमी को नारेबाज़ी से पूरा नहीं किया जा सकता और न ही ग़ुंडागर्दी करके तेल की क़ीमतों को घटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तेल की बढ़ती क़ीमतों से अच्छी तरह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि बाज़ार में तेल की कमी है और देशों को सप्लाई में कमी के बारे में गहरी चिंता है।

कमेंट्स