Nov १७, २०१८ १५:३० Asia/Kolkata
  • चाबहार, अमरीका पर ईरान व भारत की ज़बरदस्त विजय

क्षेत्र के दो अहम और रणनैतिक देशों के रूप में ईरान व भारत ऊर्जा, संपर्क परियोजनाओं और चाबहार बंदरगाह में पूंजीनिवेश जैसे क्षेत्र में सहयोग के लिए दृढ़ संकल्प रखते हैं।

टीकाकारों का कहना है कि भारत की ओर से अमरीका के दबावों की अनदेखी और विभिन्न क्षेत्रों में ईरान के साथ सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाना, दोनों देशों की बड़ी विजय है। भारत ने हालिया वर्षों में अपने आर्थिक विकास के लिए नए क्षितिजों पर ध्यान केंद्रित किया है। भारत की कई बंदरगाहों से निकट फ़ासले पर स्थित ईरान की चाबहार बंदरगाह, मध्य एशियाई देशों और इसी तरह पाकिस्तान की आवश्यकता के बिना अफ़ग़ानिस्तान तक पहुंच के लिए यह भारत के लिए सबसे अच्छा और सस्ता रास्ता हो सकता है।

 

भारत के लिए चाबहार की अहमियत की वजह?

चाबहार बंदरगाह, जो ओमान सागर में स्थित है, समुद्र के माध्यम से अफ़ग़ानिस्तान तक भारत की पहुंच को बहुत सरल बना देगी। भारत सरकार ने इस बंदरगाह के विकास में पचास करोड़ डाॅलर निवेश करने और इस बंदरगाह तक सड़क व रेल मार्ग बिछाए जाने के लिए डेढ़ अरब डाॅलर के निवेश का वादा किया है। कुछ महीने पहले भारत ने चाबहार बंदरगाह के माध्यम से गेहूं की दो खेपें अफ़ग़ानिस्तान तक पहुंचाई थीं। यह काम इस बंदरगाह के पूर्ण रूप से सक्रिय होने से पहले ही इसकी उपयोगिता क्षो सिद्ध करने के उद्देश्य से किया गया था। दक्षिणी ईरान के सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत में स्थित इस बंदरगाह का पहला चरण गत दिसम्बर में ईरान के राष्ट्रपति और भारत व कई अन्य क्षेत्रीय देशों के नेताओं की उपस्थिति में आरंभ हुआ था। इस बंदरगाह के इस्तेमाल से भारत की वस्तुएं अन्य देशों तक पहुंचने में एक तिहाई समय व पूंजी की बचत होगी।

 

भारत चाबहार के विकास का क्यों इच्छुक है?

भारत के विदेश उपमंत्री विजय गोखले का कहना  है कि अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशियाई देशों के संपर्क मार्ग के रूप में भारत चाबहार बंदरगाह के विकास का इच्छुक है। उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की मदद के परिप्रेक्ष्य में इस बंदरगाह की पूरी गुंजाइश से लाभ उठाने के लिए संभावित रूप से भविष्य में ज़ाहेदान से चाबहार तक रेलवे लाइन बिछाए जाने की परियोजना में मदद कर सकता है। भारत इसी तरह उत्तर-दक्षिण अंतर्राष्ट्रीय परिवहन कोरिडोर के विकास का भी इच्छुक है जिससे मध्य एशियाई देशों तक भारत के निर्यात का ख़र्चा बहुत कम हो जाएगा। गोखले ने कहा कि अपने पश्चिमी क्षेत्र के देशों के साथ संपर्क में भारत को पाकिस्तान के रूप में एक बड़ी बाधा का सामना है और हमने हवाई कोरिडोर बना कर अफ़ग़ानिस्तान तक पहुंच बनाई है लेकिन भारत चाहता है कि एेसे मार्ग बनाए जाएं जिनमें पाकिस्तान की बाधा हो ही नहीं और वह अपने अहम घटकों तक सरलता से पहुंच सके।

 

अमरीका दबाव के सामने भारत नहीं झुका

ईरान के साथ तेल व्यापार ख़त्म करने के लिए संसार के देशों पर अमरीका की ओर से दबाव डाले जाने के बावजूद भारत न केवल यह कि अमरीका की धमकियों के सामने झुका नहीं बल्कि उसने वाॅशिंग्टन के साथ जटिल वार्ताएं करके अपने आपको प्रतिबंधों से मुक्त करा लिया और इसी के साथ उसने एक एेसा मेकेनिज़्म बनाया कि चाबहार बंदरगाह में उसके हित सुरक्षित रहें। यूरेशिया के दरवाज़े के रूप में नई दिल्ली की नज़र में चाबहार के महत्व के दृष्टिगत भारत ने तेहरान व माॅस्को के साथ मंत्री स्तर की वार्ताएं ताकि उत्तर-दक्षिण अंतर्राष्ट्रीय परिवहन कोरिडोर की परिजनों को क्रियान्वित कर सके।

 

चाबहार, क्षेत्रीय व्यापार में वृद्धि का साधन

चाबहर बंदरगाह ने इस समय क्षेत्रीय व्यापार में वृद्धि के संबंध में अपनी भूमिका को पूरी तरह से सिद्ध कर दिया है। इस प्रकार से अफ़ग़ानिस्तान के परिवहन मंत्री ने भी कहा है कि जल्द ही उनका देश ईरान की मदद से जहाज़रानी की लाइन शुरू कर देगा ताकि चाबहार और भारत के साथ समुद्री व्यापारिक गतिविधियां आरंभ की जा सकें। अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि ईरान, भारत व अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ व्यापार के लिए जहाज़रानी की लाइन शुरू किए जाने से पूरे क्षेत्र के व्यापार में वृद्धि होगी। कुल मिला कर यह कि चाबहार बंदरगाह, ईरान व भारत के संबंध में एक बड़ी सफलता है। इसका पहल चरण आरंभ होने के बाद से ही अहम परिवर्तन आने लगे हैं और कुछ रिपोर्टों के अनुसार कराची बंदरगाह का अच्छा ख़ासा भार, चाबहार स्थानांतरित हो गया है। (HN)

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