Dec १३, २०१८ २०:२४ Asia/Kolkata

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने बल देकर कहा कि अमेरिका और ईरान के दुश्मनों का लक्ष्य था कि प्रतिबंध लगाकर और सुरक्षा विरोधी कार्यवाहियां करके ईरान में मतभेद उत्पन्न कर दें और दो गुटों को लड़ा कराके उन्हें सड़कों पर ले आयें

शहीदों के परिजनों ने बुधवार की सुबह को ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई से भेंट की जिसमें वरिष्ठ नेता ने आज की मोमिन युवा पीढ़ी में बहादुरी और शहादत की भावना को क्रांति का चमत्कार बताया।

वरिष्ठ नेता ने साम्राज्यवादियों के मुकाबले में लोगों, युवाओं और इसी प्रकार अधिकारियों की होशियारी को ईरानी राष्ट्र से दुश्मनी का कारण बताया और बल देकर कहा कि अलबत्ता हम उनसे मज़बूत और शक्तिशाली हैं क्योंकि अब तक वे इस्लामी गणतंत्र ईरान का कुछ बिगाड़ नहीं सके हैं और इसके बाद भी कुछ नहीं बिगाड़ सकेंगे।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने अपने इस बयान से इस्लामी व्यवस्था के संस्थापक स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी रह, के उस बयान की ओर संकेत किया जिसमें उन्होंने कहा था कि शहादत प्रेमी राष्ट्र कभी ग़ुलाम नहीं बन सकता।

अमेरिका ईरान की इस्लामी क्रांति के सफल होने के बाद हमेशा इस चेष्टा में रहा है कि पहले की तरह वह दोबारा ईरान पर अपना वर्चस्व जमा सके और इसके लिए वह ईरान के लिए भी वही परिस्थितियां उत्पन्न करना चाहता है जो उसने क्षेत्र के कमज़ोर देशों के लिए उत्पन्न किया है और उन्हें उसने दुधारू गाय की संज्ञा दी है परंतु अमेरिका ईरान के संबंध में कभी भी अपने लक्ष्यों को न तो साध सका है और न ही साध सकेगा।

उसकी एक वजह यह है कि ईरान के मोमिन युवा इस्लामी क्रांति के आरंभिक वर्षों की भांति आज भी देश और इस्लाम की रक्षा में अपनी ज़िम्मेदारी का आभास कर रहे हैं और वे अपने दायित्वों का निर्वाह कर रहे हैं।

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने बल देकर कहा कि अमेरिका और ईरान के दुश्मनों का लक्ष्य था कि प्रतिबंध लगाकर और सुरक्षा विरोधी कार्यवाहियां करके ईरान में मतभेद उत्पन्न कर दें और दो गुटों को लड़ा कराके उन्हें सड़कों पर ले आयें और उसका नाम उन्होंने ग्रीष्म ऋतु रखा था किन्तु इस वर्ष का ग्रीष्मऋतु साल का एक बेहतरीन ग्रीष्मऋतु था।

अतीत के परिवर्तनों पर दृष्टि इस बात की सूचक है कि अगर ईरानी राष्ट्र में त्याग, बलिदान और शहादत की भावना न होती तो क्षेत्र विशेषकर पश्चिम एशिया आतंकवादियों और उनके अपराधों के केन्द्र में परिवर्तित हो जाता।

रोचक बात यह है कि इन आतंकवादियों को पश्चिम, क्षेत्र के कुछ रुढ़िवादी देशों और जायोनी शासन का व्यापक समर्थन प्राप्त है।

बहरहाल ईरानी राष्ट्र पूरी शक्ति के साथ अमेरिका और साम्राज्यवादी शक्तियों के षडयंत्रों के मुकाबले में अदम्य साहस के साथ डटा हुआ है और कोई भी ईरानी राष्ट्र का कुछ नहीं बिगाड़ सकता। MM

 

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