Dec १५, २०१८ २१:१० Asia/Kolkata

आज़रबाइजान गणराज्य के राष्ट्रपति के साथ भेंट में ईरान के गुप्तचर मंत्री ने इस बिन्दु पर बल देते हुए कहा कि दोनों देशों के सुरक्षा तंत्रों के मध्य अच्छी सहकारिता हो रही है।

आज़रबाइजान गणराज्य के राष्ट्रपति इल्हाम अली ओफ़ ने शुक्रवार को ईरान के गुप्तचर मंत्री सैयद महमूद अलवी से भेंट की और दोनों देशों की एतिहासिक समानता को द्विपक्षीय संबंधों का आधार बताया।

परस्पर सम्मान के आधार पर इस्लामी गणतंत्र ईरान पड़ोसी देशों के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देता है।

यह भेंट उस स्थिति में हुई है जब पिछले सप्ताह दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बलों के कमांडरों ने मुलाकात की थी। ईरानी सीमा सुरक्षा बल के कमांडर ब्रिगेडियर क़ासिम रिज़ाई ने अपनी बाकू यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों में विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण बताया था।

क्षेत्र में विदेशियों की गतिविधियों के दृष्टिगत ईरान और आज़रबाइजान गणराज्य के मध्य सुरक्षा के मैदान में सहकारिता विशेष महत्व रखती है। तेहरान और बाकू के मध्य संबंधों में विस्तार न केवल दोनों राष्ट्रों के हित में है बल्कि क्षेत्र के भी हित में है।

आज़रबाइजान गणराज्य के राष्ट्रपति के साथ भेंट में ईरान के गुप्तचर मंत्री ने इस बिन्दु पर बल देते हुए कहा कि दोनों देशों के सुरक्षा तंत्रों के मध्य अच्छी सहकारिता हो रही है।

सैयद महमूद अलवी ने कहा कि हालिया पांच वर्षों के दौरान ईरान और आज़रबाइजान गणराज्य की सुरक्षा सेवाओं के मध्य अच्छी व रचनात्मक सहकारिता रही है जिससे दोनों देशों की सुरक्षा मज़बूत हुई है।

दोनों देशों की सुरक्षा सेवाएं अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे अपराधों से मुकाबले में एक दूसरे से सहकारिता कर रही हैं। दोनों देशों के मध्य होने वाली सहकारिता इस बात की सूचक है कि ईरान और आज़रबाइजान गणराज्य सहकारिता के क्षेत्र में अपने संबंधों को मज़बूत करने का पक्का इरादा रखते हैं।

इसकी एक वजह यह है कि यह सहकारिता क्षेत्र में आतंकवादी चुनौतियों से मुकाबले में प्रभावी रही है और दूसरी वजह यह है कि इस सहकारिता से दूसरे पड़ोसी देशों को भी लाभ पहुंचा है और यह सहकारिता बहुपक्षीय संबंधों की मज़बूती का कारण बनी है।

बहरहाल आज़रबाइजान गणराज्य के राष्ट्रपति ने अपने ईरानी समकक्ष डाक्टर हसन रूहानी से भेंट में शांति व सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने में तेहरान की नीतियों का समर्थन किया और बल देकर कहा कि खेद की बात है कि क्षेत्र से बाहर के देश क्षेत्रीय मामलों में हस्तक्षेप करते हैं और उनका यह हस्तक्षेप युद्ध व हत्या में वृद्धि का कारण बना है और हमारा मानना है कि विदेशी शक्तियों को क्षेत्रीय देशों के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिये। MM

 

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