Dec १६, २०१८ २०:४३ Asia/Kolkata

विश्व अमेरिका की ज़ोर ज़बरदस्ती को स्वीकार नहीं करेगा।

ईरान के विदेशमंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने अमेरिकी अधिकारियों के उस दावे को रद्द कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि ईरान ने सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2231 का उल्लंघन किया है।

विदेशमंत्री ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते से निकल कर प्रस्ताव नंबर 2231 का खुला उल्लंघन किया है और अमेरिकी अधिकारी इस प्रस्ताव के संबंध में बात करने के लायक नहीं हैं।

साथ ही उन्होंने कहा कि विश्व समुदाय परमाणु समझौते को बाकी रखना चाहता है जबकि इस समझौते को कमज़ोर करने के लिए अमेरिका जो कुछ कर सकता था उसने किया परंतु विश्व अमेरिका की ज़ोर ज़बरदस्ती को स्वीकार नहीं करेगा।

क्षेत्र में और ईरान के खिलाफ अमेरिका ने जो नीति अपना रखी है उसका लक्ष्य क्षेत्र और विश्व में संकट उत्पन्न करना है। ईरान के विदेशमंत्री ने दो साल पहले भी म्यूनीख़ सुरक्षा कांफ्रेन्स में कहा था कि दूसरों को असुरक्षित बनाकर सुरक्षा के लिए प्रयास अर्थहीन प्रयास है।

अब भी क्षेत्र में वही परिस्थितियां जारी हैं और अमेरिका दूसरों पर निराधार आरोप मढ़कर क्षेत्र में अपने हस्तक्षेप का औचित्य दर्शाने की चेष्टा में है। अमेरिका जो तस्वीर पेश करता और औचित्य दर्शाता है उससे कुछ समय के लिए आम जनमत का ध्यान उसके वास्तविक लक्ष्यों से हट सकता है परंतु उसकी इस नीति से क्षेत्र में उत्पन्न संकटों के समाधान में कोई सहायता नहीं मिलेगी।

रोचक बिन्दु यह है कि क्षेत्र में जो संकट उत्पन्न हुए हैं उनमें अमेरिका ने जो भूमिका निभाई है उसे छिपाया नहीं जा सकता।

विदेशमंत्री ने कहा है कि तेहरान ने जहां भी सैनिक सलाहकार भेजे हैं वह वहां की सरकार के आधिकारिक आह्वान पर किया है और ईरान सीरिया से केवल उसी समय निकलेगा जब वहां की सरकार ईरान से निकलने का आह्वान करेगी।

बहरहाल ईरान के विदेशमंत्री ने कहा है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात ने अमेरिका और ब्रिटेन से ख़रीदे गये हथियारों से यमन को नरक बना दिया है और सऊदी गठबंधन के सीधे हमलों में यमन के हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं।

ईरान के विदेशमंत्री के बयान का स्पष्ट संदेश है और वह यह है कि क्षेत्रीय देशों को इन चुनौतियों से निपटने के लिए प्रयास करना चाहिये और सुरक्षा की दिशा में वास्तविकता के आधार पर दृष्टिकोण अपनाना चाहिये। MM

 

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