Jan ३१, २०१९ १७:१७ Asia/Kolkata
  • ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के प्रमुख बन गए इस्राईली चुनाव का मुद्दा, जनरल क़ासिम सुलैमानी के नाम पर ज़ायोनी उम्मीदवार मांग रहे हैं वोट

अवैध शासन इस्राईल में चुनाव होने जा रहे हैं जिसमें प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू की क़िसमत दांव पर लगी हुई है।

नेतनयाहू चुनाव जीतने के लिए बार बार कोशिश कर रहे हैं कि कोई ठोस मुद्दा उनके हाथ लग जाए वहीं नेतनयाहू के प्रतिद्वंद्वी और पूर्व चीफ़ आफ़ आर्मी स्टाफ़ जनरल क़ासिम सुलैमानी, सैयद हसन नसरुल्लाह और यहया सिनवार का नाम लेकर इस्राईल की कमज़ोर सुरक्षा व्यवस्था को कोस रहे हैं।

बेनी गान्ट्ज़ ने अपना चुनावी अभियान शुरू करते हुए यह इशारा किया कि इस्राईल की सुरक्षा बिनयामिन नेतनयाहू सरकार की नीतियों की वजह से ख़तरे में पड़ गई है। साथ ही बेनी गान्ट्ज़ ने अपने भाषण में ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के प्रमुख जनरल क़ासिम सुलैमानी, हिज़्बुल्लाह लेबनान के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह और हमास के वरिष्ठ नेता यहया अस्सिनवार को संबोंधित करते हुए कहा कि आप लोगों के लिए हमारे पास बहुत साफ़ संदेश है, हम ईरान की संप्रभुता को चुनौती नहीं देते लेकिन हम यह सहन नहीं करेंगे कि इस्राईल की संप्रभुता ख़तरे में पड़े। हमास के नेता यहया सिनवार को संबोधित करते हुए बेनी गान्ट्ज़ ने कहा कि मुझे दोबारा आज़माने की कोशिश मत करना।

यह एसे समय में दिए जा रहे हैं कि जब अप्रैल महीने में होने वाले चुनावों में उस उम्मीदर की विजय की अधिक संभावना जताई जा रही है जो इस्राईल की सुरक्षा के बारे में मतदाताओं को अधिक आश्वस्त कर सके। इसका कारण यह है कि इस समय पूरे इस्राईल में ईरान, हिज़्बुल्लाह और फ़िलिस्तीनी संगठनों की ओर से इस्राईल के ग़ैर क़ानूनी अस्तित्व के लिए उत्पन्न हो जाने वाले ख़तरों का आभास किया जा रहा है।

सीरिया की लड़ाई का जो नतीजा सामने आया है उसे देखते हुए इस्राईल और पश्चिमी एशिया ही नहीं अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस को भी यक़ीन हो चुका है कि ईरान के नेतृत्व वाला इसलामी प्रतिरोध मोर्चा इतना शक्तिशाली हो चुका है कि अमरीका इस्राईल और उनके घटकों या सहयोगियों के लिए मध्यपूर्व के इलाक़े में कोई भी योजना लागू कर पाना असंभव हो गया है। दूसरी ओर इस सच्चाई से भी सब अवगत हैं कि फ़िलिस्तीन की धरती पर इस्राईल का क़ब्ज़ा ताक़त के बलबूते पर हुआ है और जैसे जैस इस्राईल और अमरीका की ताक़त और प्रभाव में कमी आ रही है इस्राईल का अस्तित्व भी ख़तरे में पड़ता जा रहा है।

अब स्थिति यह है कि इस्राईल जो कई दशकों से ख़ुद को मध्यपूर्व की सबसे बड़ी और अजेय ताक़त कहता आया था दिन रात ईरान तथा उसके घटक संगठनों की बढ़ती ताक़त पर अपनी गहरी चिंता की बात कर रहा है। इस्लामी प्रतिरोध मोर्चे के सटीक और शक्तिशाली मिसाइलों के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई बयान देने से इस्राईली अधिकारी घबराने लगे हैं क्योंकि अलग अलग देशों से पलायन कराके फ़िलिस्तीन में बसाए गए यहूदियों को कई साल से यह महसूस होने लगा है कि अवैध रूप से हथियाई गई फ़िलिस्तीनी धरती पर वह अधिक समय तक टिक नही पाएंगे क्योंकि इस्राईली अधिकारी उनकी रक्षा में सक्षम नहीं हैं।

इस समय इस्राईल के चुनाव में यदि इस्लामी प्रतिरोध मोर्चे के कमांडरों जनरल क़ासिम सुलैमानी, सैयद हसन नसरुल्लाह और यहया अस्सिनवार का नाम लिया जा रहा है तो इससे भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इस्लामी प्रतिरोध मोर्चा इस्राईल में बसने वालों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

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