इराक़ी प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी रविवार की शाम एक वरिष्ठ प्रतिनिधि मंडल के साथ अमरीकी अधिकारियों से वार्ता के लिए वाशिंग्टन पहुंच गये हैं।

इराक़ी प्रधानमंत्री एेसी स्थिति में अमरीका की यात्रा कर रहे हैं कि इराक़ तकफ़ीरी आतंकवादियों विशेषकर दाशइ से मुक़ाबला कर रहा है। वर्ष 2003 से 2011 के बीच अमरीकी सैनिकों की इराक़ में उपस्थिति की वजह से ही इस देश में दाइश अस्तित्व में आया जिसके परिणाम स्वरूप क्षेत्र में आतंकवाद और अशांति में वृद्धि के अतिरिक्त कुछ और सामने नहीं आया।

हालिया वर्षों में अमरीका के अतिग्रहण के परिणाम में इराक़ विशेषकर क्षेत्रीय जनता को भीषण तकफ़ीरी आतंकवाद का सामना करना पड़ा है। विश्व जनमत को यह पता है कि अफ़ग़ानिस्तान के अतिग्रहण के परिणाम में अलक़ायदा आतंकवादी गुट अस्तित्व में आया जबकि इराक़ पर अमरीकी अतिग्रहण के काल में दाइश अस्तित्व में आया है।

क्षेत्र के कम से कम हालिया पंद्रह वर्षीय परिवर्तनों से पता चलता है कि जहां भी अमरीका ने प्रत्यक्ष रूप से सैन्य हस्तक्षेप किया है, वहां की सभी चीज़े तबाह हो गयीं और विध्वंसकारी गुट क्षेत्र में अस्तित्व में आ गये। यही वह विषय है जिसकी ओर इराक़ी प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी ने भी इशारा किया है और इराक़ में अमरीकी षड्यंत्रों विशेषकर इस देश के अतिग्रहण के काल में व्यापक जांच की मांग की है ताकि इराक़ी पर अमरीका के सैन्य हमले और इस देश के अतिग्रहण के परिणाम से पूरी दुनिया अवगत हो सके।

हालिया दिनों में अमरीकी अधिकारियों के बयानों से यह सिद्ध होता है कि इराक़ के विरुद्ध अमरीकी सैनिकों के षड्यंत्र अभी रुकने वाले नहीं हैं और अमरीका अपने षड्यंत्रों के माध्यम से इराक़ को विभाजित करने के प्रयास में है किन्तु इराक़ी सरकार और जनता की होशियारी से वह अपने किसी भी लक्ष्य में सफल नहीं हो सकेगा। (AK)

Mar २०, २०१७ १५:१५ Asia/Kolkata
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