सीरिया के राष्ट्रपति बश्शार असद ने कहा कि दमिश्क़ सरकार ने संयुक्त राष्ट्र संघ से मांग की है कि इदलिब शहर के ख़ान शैख़ून क्षेत्र में होने वाले रासायनिक हमले की जांच के लिए एक टीम को सीरिया भेजे लेकिन अमरीका की अगुवाई में पश्चिमी देश अब तक जांच टीम भेजे जाने के रास्ते में रुकावट डालते रहे हैं।

बश्शार असद ने कहा कि सीरिया की सेना और जनता अब तक कई बार आतंकियों के रासायनिक हमलों की चपेट में आई है लेकिन संयुक्त राष्ट्र संघ ने अब तक सीरिया की इस मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया है इस लिए कि पश्चिमी सरकारों को मालूम है कि यदि कोई जांच दल सीरिया आया तो पता चल जाएगा कि ख़ान शैख़ून घटना के बारे में अमरीका और उसके घटकों ने जो प्रोपैगंडा किया है वह जाली है।

गत चार अप्रैल को ख़ान शैख़ून में हुए रासायनिक हमले में 100 से अधिक लोग मारे गए थे और लगभग 400 लोग घायल हो गए थे। इस हमले के बाद पश्चिमी और अरब गलियारों ने बिना किसी जांच के इस हमले की ज़िम्मेदारी सीरिया सरकार के सिर मढ़ दी जबकि सीरियाई सरकार ने इसका कड़ाई से खंडन किया।

वर्ष 2013 के बाद से सीरियाई सरकार के पास रासायनिक हथियार नहीं है और इसकी पुष्टि संयुक्त राष्ट्र संघ के संबंधित अधिकारी भी कर चुके हैं। दूसरी ओर ठोस रिपोर्टें आ चुकी हैं कि सीरिया और इराक़ में सक्रिय आतंकी संगठनों ने कई बार रासायनिक हमले किए हैं।

इन तथ्यों के बावजूद पश्चिमी सरकारें सीरियाई सरकार पर आरोप लगा रही हैं कि वह रासायनिक हमले कर रही है। हालांकि सीरियाई सरकार ने इस बार भी यही कहा है कि वह चाहती है कि ख़ान शैख़ून घटना की निष्पक्ष टीम द्वारा जांच करा ली जाए। मगर पश्चिमी सरकारें जो रवैया अपना रही हैं उससे आतंकी संगठनों को प्रोत्साहन मिल रहा है कि वह अपनी गतिविधियां जारी रखें। इस बीच सबसे खेदजनक भूमिका संयुक्त राष्ट्र संघ की है जो आम नागरिकों का जनसंहार होता देख भी ख़ामोश है। परिस्थितियों से साफ़ ज़ाहिर है कि अमरीका की अगुवाई में पश्चिमी सरकारें सीरिया के विरुद्ध साज़िश पर अमल कर रही हैं हालांकि इस साज़िश का ख़मियाज़ा इन सरकारों को यूरूप और अमरीका में हो रहे आतंकी हमलों के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

Apr २१, २०१७ २०:५४ Asia/Kolkata
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