यमन की हुदैदा बंदरगाह को तीसरे पक्ष के हवाले करने की योजना

एक ओर यमन के ख़िलाफ़ सऊदी अरब की असमान्य जंग जारी है, यमन की इस्तीफ़ा दे चुकी सरकार ने 17 जून को हुदैदा बंदरगाह को तीसरे पक्ष के हवाले करने की संयुक्त राष्ट्र संघ की योजना पर सहमति जतायी है।

यमन की इस्तीफ़ा दे चुकी सरकार ने इस योजना पर इसलिए सहमति जतायी क्योंकि एक ओर यमन के मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिनिधि इस्माईल वुल्द शैख़ अहमद ने यह योजना सऊदी अरब की सहमति से पेश की और दूसरी ओर यह योजना यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के ख़िलाफ़ सऊदी अरब की जंग के जारी रहने की पृष्ठिभूमि मुहैया कर रही है।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने यमन के ख़िलाफ़ जंग में सऊदी अरब पर दबाव डालने के बजाए हुदैदा बंदरगाह को तीसरे पक्ष के हवाले करने की योजना पेश की क्योंकि उसे लगता है कि इस तरह यमन के अस्ल मुद्दे से ध्यान हट जाएगा। यमन का अस्ल मुद्दा सऊदी अरब की ओर से उसकी नाकाबंदी और उस पर थोपा गया असमान्य युद्ध है।

एक अहम बिन्दु यह है कि अंसारुल्लाह ने इस योजना का विरोध किया है क्योंकि इस योजना से सऊदी अरब को यमन के ख़िलाफ़ अतिक्रमण जारी रखने का साहस मिलेगा और दूसरी ओर यह योजना सऊदी अरब के इस आरोप की पुष्टि करने के समान है कि अंसारुल्लाह हुदैदा बंदरगाह हो हथियार की तस्करी के लिए इस्तेमाल करता है। एक अहम बिन्दु यह भी है कि यह योजना हुदैदा बंदरगाह पर सऊदी अरब के क़ब्ज़े को सुनिश्चित बनाने के लिए पेश की गयी है।

अंत में सबसे अहम बात यह है कि यह योजना मानवीय उद्देश्य से ज़्यादा यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन को घेरने के लिए है क्योंकि हुदैदा बंदरगाह जधानी सनआ से 226 किलोमीटर दूर है और इस समय यह बंदरगाह पूरी तरह अंसारुल्लाह की देखरेख में है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि यह योजना यह दर्शाती है कि संयुक्त राष्ट्र संघ यमन के ख़िलाफ़ जंग में सऊदी अरब के साथ है। (MAQ/T)

 

Jun १९, २०१७ १७:२० Asia/Kolkata
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