तुर्की के इस्तंबोल नगर के विभिन्न क्षेत्रों के हज़ारों लोगों ने रैली निकाल कर सरकार के समर्थन की घोषणा की है।

तुर्की में विफल सैन्य विद्रोह को एक साल पूरा होने पर इस्तंबोल नगर के हज़ारों लोगों ने जुलूस निकाल कर और एक स्थान पर एकत्रित हो कर अर्दोग़ान सरकार की नीतियों के समर्थन की घोषणा की। इस रैली में भाग लेने वालों ने वर्ष 2016 के सैन्य विद्रोह में अमरीका की भूमिका और उसके हस्तक्षेप की निंदा करते हुए सरकार से मांग की कि वह इंजरलीक सैन्य छावनी को बंद कर दे और इसमें मौजूद विदेशी सैनिकों विशेष कर अमरीकी सैनिकों को बाहर निकाल दे। टीकाकारों का कहना है कि यह रैली दो पहलुओं से काफ़ी अहम है। पहला आयाम, अन्कारा सरकार से रैली में भाग लेने वालों की मांग का है और दूसरा पहलू विद्रोहियों के बारे में तुर्क राष्ट्रपति का बयान और उनकी ओर से तुर्की की सरकार व राष्ट्र के दुश्मनों का परिचय है।

 

रजब तैयब अर्दोग़ान की सरकार के समर्थकों ने एेसी स्थिति में इंजरलीक छावनी को बंद करने की मांग की है जब पिछले कई दशकों से तुर्की की सरकारें इस छावनी को पश्चिमी सरकारों विशेष कर अमरीका के हवाले करती आई हैं और इस संबंध में उन्होंने जनता के विरोध पर ध्यान नहीं दिया है। अब देखना है कि तुर्की की वर्तमान सरकार इस संबंध में क्या रुख़ अपनाती है? दूसरी ओर तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान ने सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता कमाल क़ेलीचदार ओग़लू को विश्वासघाती और ग़द्दार बताते हुए दावा किया है कि उन्होंने इस विद्रोह का नेतृत्व करके तुर्क राष्ट्र का अपमान किया है। अर्दोग़ान का यह बयान एेसी स्थिति में आया है कि क़ेलीचदार ओग़लू ने विद्रोह के विरोध के संबंध में उनकी सभी मांगों का पालन किया है। कुल मिला कर कहा जा सकता है कि जून 2016 में तुर्की में हुए विफल सैन्य विद्रोह को एक साल बीत जाने के बावजूद उसके झटके अब भी तुर्की के राजनैतिक मंच को हिला रहे हैं। (HN)

Jul १६, २०१७ १८:५९ Asia/Kolkata
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