• सीरिया में लड़ाई अपने अंत के क़रीब, फ़ुटबाल मैच की ख़ुशी अच्छा शगून

सीरियाई सेना ने दैरुज़्ज़ूर शहर की घेराबंदी तोड़ दी और शहर का 65 प्रतिशत भाग आतंकियों के क़ब्ज़े से आज़ाद करा लिया गया है।

दूसरी ओर रक़्क़ा शहर में भी सीरियन डेमोक्रेटिक फ़ोर्स प्रविष्ट कर चुकी है जिसमें अधिकतर कुर्द लड़ाके शामिल हैं। इस स्थिति में यह कहा जा सकता है कि निर्णायक घड़ी निकट आ चुकी है और अब सीरिया की धरती पर लड़ाई की प्रवृत्ति बदल जाएगी और नए गठबंधन अस्तित्व में आएंगे।

सीरिया के मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष दूत स्टीफ़न दी मिस्तूरा का कहना है कि विरोधी संगठनों को यह समझ लेना चाहिए कि यह लड़ाई वह नहीं जीत सके और सीरियाई सरकार को भी चाहिए कि विजय की बात न करे इस लिए कि किसी भी पक्ष के लिए यह कहना संभव नहीं है कि उसने लड़ाई जीत ली है।

मगर स्थिति यह है कि विद्रोही संगठन अपनी पराजय की बात मुंह से स्वीकार करने पर तैयार नहीं जबकि सात साल से भयानक युद्ध का सामना करने वाली सीरियाई सरकार को पूरा यक़ीन है कि उसने क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय शक्तियों का मुक़ाबला करते हुए विजय प्राप्त की है।

जब पूर्वी हलब को सीरियाई सेना ने आज़ाद कराया था तो बहुत सावधानी के साथ जश्न मनाया गया लेकिन जब तीन साल से दाइश की घेराबंदी में रहने वाली दैरुज़्ज़ूर शहर के भीतर सीरियाई सेना ने प्रवेश किया तो ख़ुशी अपने चरम पर पहुंच गई। अतः एसा नहीं लगता कि दि मस्तूरा की नसीहत कोई मानेगा।

अब यहां यह सवाल है कि क्या सीरियाई सरकार विरोधी गुटों से वार्ता करेगी? हमें एसा नहीं लगता कि सीरियाई सरकार इन गुटों से कोई बात करेगी क्योंकि इन गुटों के ठिकाने देश से बाहर हैं सीरियाई सरकार उन्हें विदेशों का मुखौटा मानती है जिनकी अपनी कोई नीति नहीं है बल्कि देश के भीतर शांति और संधि के हर कार्यक्रम को विफल बनाना इन गुटों का सबसे प्रमुख काम रहता है।

आतंकी संगठनों के ख़तरे की बात को प्रभावी रूप से पेश करना और विश्व शक्तियों को इस ख़तरे से निपटने के लिए तैयार करना रूस का बहुत चालाकी भरा कार्यक्रम था जो परी तरह सफल रहा। इसका यह मतलब नहीं कि आतंकी संगठनों का कोई ख़तरा नहीं था। ख़तरा तो था लेकिन इन संगठनों ने सीरियाई सरकार को उतना नहीं डराया जितना अमरीका और यूरोपीय देशों में आतंकी हमले करके इन देशों को भयभीत कर दिया था।

पश्चिमी टीकाकार भी इस बिंदु पर एकमत दिखाई देते हैं कि दाइश का काम तमाम होने वाला है। मतभेद इस बारे में है कि इस संगठन का भविष्य क्या होगा। भविष्य में यह संगठन सीरिया और इराक़ के भीतर तथा यूरोप और अमरीका के भीतर किस प्रकार के ख़तरे पैदा कर सकता है।

अगर राजनैतिक दुशमनी और इंतेक़ाम का सिलसिला चला तो इस माहौल में आतंकी संगठन को फलने फूलने का मौक़ा मिल जाएगा। अतः ज़रूरी है कि सहनशीलता और समरसता की दीर्घकालिक नीति अपनाई जाए ताकि आतंकियों को अनुकूल वातावरण न मिल सके।

सीरियाई सरकार ने अपनी कुछ ग़लतियां स्वीकार की थीं और संवाद के दरवाज़े खोल दिए थे। लेकिन अब युद्ध तेज़ हो गया और क्षेत्रीय व बाहरी देशों ने विरोधी संगठनों को हथियारों की सप्लाई शुरू कर दी तो यह कार्यक्रम रूक गया था।

अब जब आतंकवाद का ख़तरा समाप्त हो रहा है तो ज़रूरी है कि सच्चे दिल से मेल मिलाप की नीति अपनाई जाए। आज यह मेलमिलाप पूरे राष्ट्र की मांग बन गया है ईरान की टीम से मैच में सीरिया की फ़ुटबाल टीम ने जो शानदार प्रदर्शन किया उसके बाद पूरे देश में जिस तरह ख़ुशी का माहौल छलक पड़ा उसे अच्छा शगुन समझा जा सकता है।

साभार रायुल यौम

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Sep ०७, २०१७ १८:१८ Asia/Kolkata
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