• सीरिया संकट शुरू होने के बाद हसन नसरुल्लाह की वरिष्ठ नेता से पहली मुलाक़ात, कई अहम रहस्योद्घाटन

हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैय्यद हसन नसरुल्लाह ने इमाम हुसैन (अ) का ग़म मनाने वालों के साथ एक बैठक में कहा है कि हम सीरिया का युद्ध बहुत ही समझबूझ के साथ लड़ रहे हैं और यह युद्ध लेबनान और क्षेत्र के इतिहास को एवं समीकरणों को बदलकर रख देगा।

उन्होंने कहा, हम इस युद्ध में जीत चुके हैं, कुछ मोर्चे अभी बाक़ी हैं, इन पर भी हमारी जीत निश्चित है।

हिज़्बुल्लाह प्रमुख का कहना था कि हमारे दुश्मन की योजना विफल हो चुकी है और अब वह हमसे वार्ता करना चाहता है, ताकि इस बहाने से कुछ उसके हाथ लग सके।

सीरिया में दाइश और नुस्रा फ़्रंट के साथ लड़ाई के बारे में उन्होंने कहा, 2010 के बाद से यह सबसे कठिन लड़ाई थी, बल्कि 2006 में इस्राईल के ख़िलाफ़ युद्ध से भी अधिक ख़तरनाक थी।

सीरिया संकट के बाद तेहरान में ईरान के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद अली ख़ामेनई के साथ अपनी पहली मुलाक़ात का ज़िक्र करते हुए सैय्यद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि उस वक़्त सभी इस नतीजे पर पहुंच चुके थे कि अगले 2 या 3 महीनों में बशार असद की सरकार का पतन हो जाएगा। मैंने इस मुलाक़ात में वरिष्ठ नेता से दुश्मन की योजना के बारे में बात की और कहा कि अगर हम दमिश्क़ में उनका मुक़ाबला नहीं करेंगे, तो हमें दक्षिणी लेबनान और देश के अन्य भागों में उसका सामना करना होगा। उन्होंने कहा, न केवल इन लेबनान में बल्कि ईरान के किरमान, ख़ूज़िस्तान और तेहरान में।

वरिष्ठ नेता ने कहा, हमें इस लड़ाई में तीन मोर्चों का गठन करना होगा। ईरान, लेबनान और सीरिया। इन मोर्चों की कमान बशार असद के हाथ में होगी। हमें कोशिश करना होगी कि वह जीत जाएं और वह जीतेंगे।

हसन नसरुल्लाह ने आगे कहा, युद्ध शुरू होने के डेढ़ या दो साल बाद, सऊदी अरब ने सीरिया के राष्ट्रपति बशार असद के लिए एक संदेश भेजा। इस संदेश में असद से कहा गया था कि एक प्रेस कांफ़्रेंस में वह हिज़्बुल्लाह और ईरान से संबंध तोड़ने का एलान कर दें तो यह संकट समाप्त हो जाएगा।

उन्होंने कहा, इराक़ में हमने अपने भाईयों को चेतावनी दी थी कि अगर वह दाइश के आतंकवादियों से मुक़ाबला नहीं करेंगे तो वे दैरुज़्ज़ोर पर क़ब्ज़ा कर लेंगे और उनका अगला लक्ष्य इराक़ होगा। हमारी बात सही थी और कुछ समय बाद ही इस आतंकवादी गुट ने दो तिहाई इराक़ पर क़ब्ज़ा कर लिया और कर्बला से 20 किलोमीटर, बग़दाद से 40 किलोमीटर और काज़मैन में रौज़े से 200 मीटर की दूरी पर पहुंच गए।

इमाम हुसैन (अ) की अज़ादारी का महत्व उजागर करते हुए सैय्यद हसन नसरुल्लाह ने कहा, लोगों को चाहिए कि मजलिसों में उपस्थित होकर इमाम हुसैन (अ) के आंदोलन को सही तौर पर समझना चाहिए और इसे दूसरों तक पहुंचाना चाहिए। msm  

 

Sep १२, २०१७ १६:४२ Asia/Kolkata
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