अरब संघ ने अपनी पुरानी नीतियां दोहराते हुएएक बार फिर एक बयान जारी करके अंतर्राष्ट्रीय हल्क़ों में फ़िलिस्तीन के मुद्दे के समर्थन का दावा किया है।

अरब संघ का यह बयान एेसी स्थिति में सामने आया है कि अरब संघ के कुछ सदस्य देश खुलकर ज़ायोनी शासन के साथ निकट संबंध रखते हैं। इन हालात में अरब संघ की परिषद की 148वीं बैठक विदेशमंत्री के स्तर पर आयोजित हुई। यह बैठक मंगलवार को क़ाहिरा में अरब संघ के सचिवालय में एक बयान जारी करके समाप्त हो गयी।

फ़िलिस्तीन के विषय पर अरब संघ का यह बयान एेसी स्थिति में सामने आया है कि अरब सरकारों द्वारा वित्तीय, आर्थिक और राजनैतिक मामलों में फ़िलिस्तीन का समर्थन व्यवहारिक रूप से कम हो गया है।  इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र संघ की विकास और व्यापार कांफ़्रेंस ने कहा है कि फ़िलिस्तीन के लिए संस्थाओं और देशों की वित्तीय सहायताएं वर्ष 2014 से 2016 के बीच 38 प्रतिशत कम हुई है।

सहायताओं में इस कमी का बहुत बड़ा भाग अरब देशों से संबंधित रहा है जिन्होंने अपने फ़िलिस्तीनियों की सहायता के बारे में अपने वचनों पर अमल नहीं किया। अरब नेताओं ने फ़िलिस्तीनी जनता की सहायता में एेसी हालत में संकोच कर रहे हैं कि वह क्षेत्र में तकफ़ीरी आतंकवादियों के व्यापक समर्थन में व्यस्त हैं। फ़िलिस्तीन के बारे में अरब संघ की पल्ला छुड़ाने की यह प्रक्रिया एेसी हालत में जारी है कि फ़िलिस्तीन, इस्लामी जगत के महत्वपूर्ण विषयों में से एक है।

यह एेसी स्थिति में है कि ज़ायोनी शासन की बढ़ती दमनकारी और वर्चस्वादी नीतियों से मुक़ाबला करने के लिए अभी तक अरब सरकारों की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गयी। दुनिया ने देख लिया कि फ़िलिस्तीन के मुद्दे, सीरिया, यमन और लीबिया के संकट के हल में अरब संघ बुरी तरह विफल रहा है और इस बीच अरब संघ ने अरब शांति योजना नामक  फ़िलिस्तीन के बारे में एक लज्जाजनक तथाकथित योजना पेश की है, यह योजना सऊदी अरब की ओर से पेश की गयी। (AK)

Sep १३, २०१७ १६:०१ Asia/Kolkata
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