• यमन पर अमेरिका और सऊदी के पाश्विक हमले, अत्याचार का सबसे भयानक उदाहरण

यमन के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन अंसारूल्लाह के प्रमुख ने यमन पर अमेरिका और सऊदी अरब के हमलों की निंदा करते हुए इन हमलों को अत्याचार का सबसे भयानक चेहरा बताया है।

यमन इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन अंसारूल्लाह के प्रमुख अब्दुल मलिक अलहौसी ने दक्षिण यमन के ब्रिटिश साम्राज्य के कब्ज़े से स्वतंत्रता की वर्षगांठ के अवसर पर देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि अत्याचार और अतिक्रमणकारियों के मुक़ाबले में खड़ा होने धार्मिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि आज हमारा राष्ट्र अमेरिका और सऊदी अरब के अत्याचारों का मुक़ाबला करके अपना धार्मिक कर्तव्य बहुत ही अच्छे से निभा रहा है।

अंसारूल्लाह आंदोलन के प्रमुख ने ब्रिटेन द्वारा यमन के अतिग्रहण की घटनाओं में स्थानीय गद्दारों और एजेंटों की भुमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि आज एक बार फिर दक्षिण यमन ऐसे ही गद्दारों और एजेंटों के कारण साम्राज्यवादी शक्तियों के चंगुल में चला गया है, लेकिन सऊदी और यूएई के एजेंटों को यह जान लेना चाहिए कि उनकी गिनती भी उन्हीं ऐजेंटों में की जाएगी जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य का दामन थाम लिया था।

यमन के अंसारूल्लाह आंदोलन के प्रमुख अब्दुल मलिक अलहौसी ने देश के सामरिक क्षेत्रों में वर्चस्व जमाने के लिए अतिग्रहणकारियों के प्रयासों और उनकी साज़िशों का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी और कहा कि हम सबको दुश्मन के हर षड़यंत्र का मुक़बला करने के लिए हर समय तैयार रहना चाहिए।

ज्ञात रहे कि यमनी राष्ट्र ने 14 अक्टूबर 1963 में ब्रिटिश अतिग्रहण और साम्राज्य के ख़िलाफ़ अपना क्रांतिकारी आंदोलन शुरू किया था और यमन की बहादुर जनता ने अपने प्रयासों और बलिदान से दक्षिण यमन से ब्रिटिश साम्राज्य को निकाल बाहर किया था। (RZ)

 

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Oct १५, २०१७ २०:०६ Asia/Kolkata
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