• इस्राईली सेना के पूर्व प्रवक्ताः नेतनयाहू को चाहिए कि बहुत सावधान रहें, पूर्ण विजय मिलते ही इस्राईल के ख़िलाफ़ कई मोर्चे खोल सकते हैं बश्शार असद

इस्राईल के विमानों पर सीरिया के मिसाइल हमले की गूंज अब तक इस्राईल के भीतर सुनाई दे रही है। अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन अर्थात इस्राईल में आम लोगों की सतह पर भी और नीति निर्धारकों के स्तर पर भी यह विषय चर्चा के केन्द्र में है।

आम लोगों में यह विचार प्रबल हो गया है कि आतंकी संगठन दाइश तथा अन्य चरमपंथी संगठनों पर विजय प्राप्त कर लेने के बाद जिन्हें इस्राईल का भरपूर समर्थन प्राप्त था अब सीरिया समीकरण बदल चुके हैं।

इस्राईली अधिकारियों ने वैसे तो बड़े दावे किए थे कि रूस के साथ उनका पूर्ण समन्वय पहले ही हो चुका है लेकिन इस्राईल के चैनल-2 ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हालिया इस्राईली हमले से पहले इस्राईल ने जो हमला किया था उस पर रूस क्रोधित हो गया और मास्को में तेल अबीब के कूटनयिक और मिलिट्री अताशी को विदेश मंत्रालय में तलब कर लिया गया और इस्राईल की कड़ी आलोचना की गई। इस्राईली टीवी चैनल ने जानकार सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया कि इस्राईली सैनिकों और कमांडरों के लिए सीरिया की ओर से ख़तरा बढ़ गया है।

दूसरी ओर मआरीव अख़बार में इस्राईली सेना के पूर्व प्रवक्ता आफ़ी बिनयाहू ने अपने लेख में लिखा कि पिछले हफ़्ते लेबनान की वायु सीमा में उड़ रहे इस्राईली विमानों पर सीरिया का मिसाइल हमला और इसके जवाब में इस्राईल की ओर से सीरिय की मिसाइल बैट्री पर हमला अपूर्व घटना है। इस तरह इस्राईल को यह संदेश दिया गया है कि अब सीरिया और लेबनान की वायु सीमाएं उसके लिए खुली हुई नहीं हैं। बिनयाहू ने अपने लेख में लिखा कि इस्राईल के लिए अपने हितों की रक्षा करना ज़रूरी है लेकिन उसे चाहिए कि यह काम बहुत सावधानी और सूझबूझ से करे। यदि इस्राईल ने यह कोशिश की कि सीरियाई वायु सीमा में उसके विमान चकराते फिरें तो फिर इस्राईल को बहुत भारी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है।

बिनयाहू ने लिखा कि जिस दिन आतंकियों के विरुद्ध बश्शार असद ने अपनी विजय पूरी कर ली उसी दिन हो सकता है कि वह इस्राईल से हिसाब किताब बराबर करने के लिए कार्यवाही करें। यह काम सीमा पर लेबनान की तरफ़ से या जार्डन की तरफ़ से अथवा समुद्र से हो सकता है। सीरिया यह कार्यवाही हो सकता है कि अकेले करे या हिज़्बुल्लाह और ईरान की मदद से करे। इस्राईल को चाहिए कि बहुत होशियार रहे और कोई भी ग़ैर ज़रूरी कार्यवाही करने से बचे। हमें राजनेताओं को समझाना होगा कि वह बयानबाज़ी करने पर मजबूर नहीं हैं।

साभार रायुल यौम

 

Oct २१, २०१७ १८:३१ Asia/Kolkata
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