• मध्यपूर्व में शतरंज की बिसात उलझी, कौन पिटा और किसने मारी बाज़ी

मध्यपूर्व के हालात के शतरंज की बिसात दिन प्रतिदिन उलझती जा रही है और इस खेल के क्षेत्रीय और विदेशी खिलाड़ी अपने प्रतिस्पर्धियों को मात देने और अपने हितों को आगे बढ़ाने तथा सामने वाले के प्रभावों को कम करने के लिए अपने मोहरों को इधर से उधर घुमा रहे हैं।

इसी परिप्रेक्ष में लेबनान के प्रधानमंत्री साद हरीरी का त्यागपत्र और ईरान और क्षेत्र में ईरान के महत्वपूर्ण घटक हिज़्बुल्लाह पर ओछा आरोप था।

 

यही नहीं हरीरी के त्यागपत्र के बाद सऊदी अरब और ज़ायोनी शासन के अधिकारियों के बयानों से पता चलता है कि यह कोई आम बात नहीं है बल्कि हिज़्बुल्लाह के विरुद्ध एक सोची समझी साज़िश है। उदाहरण स्वरूप ज़ायोनी शासन के युद्धमंत्री एविग्डोर लेबरमैन ने साद हरीरी के त्यागपत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस्राईली सेना ईरान के गठबंधन से मुक़ाबले के लिए तैयार है। हम ईरानी मोर्चे को कभी भी अपनी उत्तरी सीमा पर अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने की अनुमति नहीं देंगे।

 

इस्राईली अधिकारियों के साथ ही सऊदी अधिकारियों के भी मुंह खुल गये और इराक़ में सऊदी अरब के पूर्व राजदूत और फ़ार्स की खाड़ी सहकारिता परिषद के मामलों के मंत्री सामिर सबहान ने हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ पक रही खिचड़ी से पर्दा उठाया। उन्होंने अलअरबिया टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि मैंने लेबनान के त्यागपत्र दे चुके प्रधानमंत्री साद हरीरी से कहा कि हिज़्बुल्लाह को अतिक्रमणकारी कार्यवाहियां कर रहा है वह लेबनान और हिज़्बुल्लाह की ओर से सऊदी अरब के ख़िलाफ़ खुली जंग का एलान है। हिज़्बुल्लाह सरकार द्वारा लिए गये समस्त फ़ैसलों को प्रभावित कर देता है।

 

उनका कहना था कि लेबनानी सरकार को सऊदी अरब के विरुद्ध इन छापामारों के ख़तरों को समझना चाहिए। हिज़्बुल्लाह सऊदी अरब में होने वाली हर आतंकवादी कार्यवाही में जो रियाज़ के लिए ख़तरा है, शामिल होता है। लेबनान वासियों को हिज़्बुल्लाह के साथ या शांति के साथ रहने में से किसी एक रास्ते का चयन करना होगा।

 

दूसरी ओर इस्राईली पत्रकार बराक रेफ़िड ने ज़ायोनी विदेशमंत्रालय के उस पत्र से पर्दा उठाया जो उसने विभिन्न देशों में अपने दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को भेजे थे। इस्राईली पत्रकार लिखते हैं कि पहली बार इस्राईल खुलकर सऊदी अरब की मदद के लिए दौड़ पड़ा। इस्राईली विदेशमंत्रालय के पत्र में आया है कि समस्त देशों में इस्राईली कूटनयिकों को चाहिए कि वह उन देशों में विभिन्न स्तर पर अपने प्रभावों का प्रयोग करते हुए सऊदी अरब के समर्थन में लेबनान की आगामी सरकार में हिज़्बुल्लाह को भाग लेने से रोक दें।

 

वर्तमान स्थिति पर नज़र डालने से पता चलता है कि लेबनान के राजनैतिक मंच पर हिज़्बुल्लाह एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है और यह संभव ही नहीं है कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह के बिना सरकार का गठन हो जाए। ध्यान योग्य बात य है कि सऊदी अरब, ज़ायोनी शासन और पश्चिम सहित कुछ विदेशी खिलाड़ी हिज़्बुल्लाह को लेबनान की राजनीति से दूर रखने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगाए हुए हैं किन्तु इसमें भी वह अभी तक विफल रहे हैं। यहां पर प्रश्न यह उठता है कि यह लोग हिज़्बुल्लाह को सत्ता से दूर क्यों रखना चाहते हैं, क्या वह इस माध्यम से उसे सीमित करने की कोशिश में हैं? या हिज़्बुल्लाह के विरुद्ध कोई नई साज़िश तैयार की जा रही है।

यहां पर यह सवाल उठता है कि हिज़्बुल्लाह के विरुद्ध षड्यंत्र में सऊदी अरब और ज़ायोनी शासन कितने सफल हो पाते हैं? जब ज़ायोनी – अरब गठबंधन वर्तमान समय में हिज़्बुल्लाह का बाल बांका नहीं कर सका और न ही भविष्य में कर सकता है क्योंकि हिज़्बुल्लाह ने हालिया वर्षों में विशेषकर सीरिया और इराक़ में दाइश के प्रकट होने के बाद सैन्य दृष्टि से अपनी शक्ति में वृद्धि की है। इस समय हिज़्बुल्लाह के पास लंबी दूरी के असंख्य मीज़ाइल हैं और वह बड़ी सरलता से इस्राईल के हर कोने को निशाना बना सकता है, कुछ रिपोर्टों में तो यहां तक कहा गया है कि हिज़्बुल्लाह के राकेटों और मीज़ाइलों की संख्या ढेड़ लाख से भी अधिक है।

 

यहां पर रोककर मैं एक बात कहना चाहता हूं कि एक बार किसी विदेशी महिला पत्रकार ने उनसे हिज़्बुल्लाह के पास मौजूद मीज़ाइलों और राकेटों की संख्या के बारे में पूछा था तो उन्होंने हंस कर टाल दिया और कहा कि यह तो समय ही बताएगा।

 

बहरहाल हालिया वर्षों में हिज़्बुल्लाह के जवानों की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि हुई है और इस संगठन ने सीरिया में दाइश को नाकों चने चबवा दिए और अपनी शक्ति का लोहा मनवा लिया और हिज़्बुल्लाह की इन्हीं सफलताओं से सऊदी अरब और इस्राईल बुरी तरह भयभीत हैं और उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि हिज़्बुल्लाह के रास्ते को कैसे रोका जाए और हरीरी वाली साज़िश का मोहरा भी उनका पिट गया है, अब समय ही बताएगा कि मध्यपूर्व में बिछी शतरंत की बिसात पर किसका मोहरा पिटा और किसने मोहरे ने बाज़ी मार ली। (AK)

Nov १३, २०१७ १८:४२ Asia/Kolkata
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