सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा है कि क़ुद्स के बारे में ट्रम्प के फैसले से जायोनी शासन के अंत की उलटी गिनती आरंभ हो गयी है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 6 दिसंबर को क़ुद्स को जो इस्राईल की राजधानी घोषित किया था उसके खिलाफ और फिलिस्तीन के समर्थन में 11 दिसंबर को दक्षिणी बैरूत में प्रदर्शन हुए।

इस प्रदर्शन में विभिन्न पार्टियों के दसियों हज़ार कार्यकर्ताओं, लोगों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने क़ुद्स के बारे में ट्रम्प के हालिया निर्णय की भर्त्सना की और बल देकर कहा कि क़ुद्स सदैव फ़िलिस्तीन की राजधानी रहेगा।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि ट्रम्प यह सोचते थे कि क़ुद्स को इस्राईल की राजधानी घोषित कर देने से पूरी दुनिया उनके साथ हो जायेगी और अमेरिकी फैसले के प्रति सहमति जताने में सबके मध्य होड़ लग जायेगी किन्तु उन्होंने दुनिया के विरोध को देखा और वह अकेले व अलग थलग पड़ गये।

इसी प्रकार सैयद हसन नसरुल्लाह ने ट्रम्प के फैसले को जायोनी शासन के अंत का आरंभ बताया।

इस भाषण में ध्यान योग्य बिन्दु यह है कि सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि जायोनी शासन की विशेषता अपने अंत की ओर अग्रसर होना है और क़ुद्स के बारे में ट्रम्प के फैसले से जायोनी शासन के अंत की उलटी गिनती आरंभ हो गयी है।

ट्रम्प के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क़ुद्स के समर्थन में जो प्रदर्शन हो रहे हैं वास्तव में वे अभूतपूर्व हैं और यह विषय इस बात का सूचक है कि विश्व समुदाय इस्राईल के समर्थन में अमेरिकी गतिविधियों के खिलाफ एकजुट होता जा रहा है।

अभी कुछ समय पहले सीआईए ने अपनी एक रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि इस्राईल अगले कुछ वर्षों के अलावा बाक़ी नहीं रहेगा।

एक प्रसिद्ध अमेरिकी विश्लेषक जेफ़ गेट्स ने भी कहा है कि अध्ययन इस बात को दर्शाता है कि जायोनी शासन का अंत निश्चित है और प्रबल संभावना यह है कि यह कार्य अगले कुछ वर्षों में हो जायेगा। MM

 

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Dec १२, २०१७ २०:०२ Asia/Kolkata
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