•  किम जोंग ऊन की पाठशाला में एडमिशन लें अरब शासक!

जब भी अरब शासक या उनमें से कुछ ही थोड़ा सा भी साहस दिखाते हैं और अमरीका आदेश मानने से इंकार करते हैं तो वह अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और उनके इर्द गिर्द जमा नस्लपरस्तों ललकार सकते हैं।

अरब नेताओं के गढ़े में गिरने की प्रक्रिया तब शुरू हुई जब मिस्र के राष्ट्रपति अनवर सादात ने अपना बुज़िदली भरा बयान दिया था कि 100 में से 99 तुरुप के पत्ते अमरीका के हाथ में हैं, अरबों के पास अमरीका की गोद में जाकर शरण ले लेने के अलावा कोई चारा नहीं है। खेद की बात यह है कि अधिकतर अरब नेताओं ने इसी विचार को स्वीकार कर लिया और इसी आधार पर अपनी नीतियां बनाना शुरू कर दिया।

गत सोमवार को इस्राईली विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने घोषणा की कि अमरीका के उप राष्ट्रपति माइक पेन्स ने मध्यपूर्व की अपनी यात्रा को टाल दिया है। वह इस यात्रा में मिस्र, अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन और रामल्ला जाने वाले थे। यह यात्रा अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई है।

यात्रा इस लिए टाली गई कि मिस्र के अलअज़हर विश्वविद्यालय के प्रमुख शैख़द अहमद अत्तैयब और काप्टिक ईसाइयों के धर्म गुरू तवाज़रूस द्वितीय इसी प्रकार फ़िलिस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास ने पेन्स से मुलाक़ात करने से इंकार कर दिया था और इस संदर्भ में तेल अबीब और क़ाहेरा में अमरीकी दूतावासों ने उन्हें मनाने की जो कोशिशें कीं वह नाकाम रहीं। वार्ता से इंकार अमरीकी दूतावास तेल अबीब से बैतुल मुक़द्दस स्थानान्तरित करने के फ़ैसले की वजह से किया गया।

अमरीकी प्रशासन हमेशा धौंस धमकी के साथ और अपमानजनक स्वर में बात करता है, यदि उसके सामने नर्मी और लचीलापन दिखाया जाए तो वह और भी ग़ुर्राने लगता है।

जब अरबों ने राष्ट्रपति ट्रम्प को लालकार दिया और राष्ट्र संघ की महासभा में पहुंच गए और वहां अमरीका के फ़ैसले के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित करवा लिया तो उन्हें सारी दुनिया में सम्मान मिला यहां तक कि अमरीका के यूरोपीय घटकों जैसे ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने भी उनका साथ दिया।

अरब नेताओं के लिए ज़रूरी है कि अमरीका से निपटने का तरीक़ा सीखने के लिए उत्तरी कोरिया के शासक किम जोंग ऊन की एकेडमी में एडमिशन लें। यह व्यक्ति ट्रम्प का नाम ज़मीन पर रगड़ देने में सफल हुआ है। उसने ट्रम्प की धमकियों को मज़ाक़ में उड़ा दिया और उसका जवाब मिसाइल परीक्षणों द्वारा दिया।

किम जोंग ऊन ने ट्रम्प को नए साल के तोहफ़े के रूप मे यह बयान दिया उनकी मेज़ पर परमाणु बटन मौजूद है और जब वह अपने बेडरूम में जाते हैं तब भी यह बटन उनके साथ होता है, अमरीका के किसी भी हमले का जवाब देने के लिए इतना ही काफ़ी है कि बटन को हल्के से दबा दिया जाए।

अमरीका के उप राष्ट्रपति माइक पेन्स क्षेत्र की यात्रा टालने पर विवश हो गए, अरब नेताओं विशेष रूप से उनमें जो सज्जन हैं उन्हें इससे पाठ लेना चाहिए। उन्हें फ़ैसला करना चाहिए कि वह अमरीकी राष्ट्रपति या किसी भी अमरीकी अधिकारी से तब तक नहीं मिलेंगे जब तक अमरीका दूतावास स्थानान्तरित करने के अपने फ़ैसले से पीछे नहीं हट जाता और जब तक वह दुनिया के अरबों और मुसलमानों से माफ़ी नहीं मांग लेता। इसके बाद इन नेताओं को चाहिए कि अमरीकी व इस्राईली दूतावासों को बंद करने जैसे और कड़े क़दम उठाएं।

हम फ़ादर तवाज़रोस के आभारी हैं, अलअज़हर के प्रमुख के आभारी हैं, महमूद अब्बास के अधिकारी है और आशा करते हैं कि वह अपने इस रुख़ पर अटल रहेंगे और अमरीका या इस्राईल के दबाव में कदापि नहीं आएंगे।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के प्रख्यात (फ़िलिस्तीन मूल के) लेखक व टीकाकार  

 

Jan ०२, २०१८ १५:३७ Asia/Kolkata
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