• सज़ाए मौत के दो साल बाद भी आले सऊद को दहला देती है शैख़ निम्र की आवाज़!

“मेरा नाम निम्र बाक़िर अमीन अलनिम्र है मैं अपने पूरे होशो हवास में स्वीकार करता हूं कि मेरे सारे भाषण और बयान मेरी इच्छा से थे और मुझे उन पर कोई पछतावा नहीं है।”

यह शब्द उस महान साहसी धर्मगुरू के हैं जिन्होंने अपने शब्दों से सऊदी अरब के तख़्त को हिला कर रख दिया। आले सऊदी की शाही सरकार को दिन रात बेचैन रखने वाली इस आवाज़ को हमेशा के लिए दबा देने के उद्देश्य से दो जनवरी 2016 को शैख़ निम्र को शहीद कर दिया गया।

इस तारीख़ में 47 आतंकियों की गरदनें उड़ाई गईं जिनमें अधिकतर का संबंध अलक़ायदा से था जबकि तीन युवाओं को पूर्वी सऊदी अरब के प्रदर्शनों में भाग लेने के दोष में सज़ाए मौत दी गई। भेदभाव और सरकारी बेइंसाफ़ी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करना सऊदी अरब में दंडनीय अपराध ही नहीं बल्कि एसा अपराध है जिस पर सज़ाए मौत दी जाती है। यह तीनों युवा अली अर्रिब्ह, मुहम्मद अस्सुवैमल और मुहम्मद अश्शुयूख़ थे।

शैख़ निम्र जो भाषण देते थे उनमें बड़ी तार्किक बहसों के साथ अपनी बात रखते थे। उन्होंने समाज में शाही ख़ानदान की ओर से आम जनता के अधिकारों के हनन, शीया समुदाय के मुसलमानों के साथ खुलकर भेदभाव पर टिप्पणी की। उन्होंने वंशानुगत व्यवस्था के तहत अब्दुल अज़ीज़ के बेटों के बीच सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रिया पर भी टिप्पणी की। शैख़ निम्र ने शाही व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया और प्रदर्शनों के समर्थन की  घोषणा की। यही नहीं शैख़ निम्र ने बहरैन की जनता के शांति पूर्ण प्रदर्शनों का समर्थन भी किया और बहरैन की शाही सरकार को भी आड़े हाथों लिया जो सऊदी सरकार की मदद से प्रदर्शनकारियों का जनसंहार कर रही है।

शैख़ निम्र की हत्या को दो साल का समय बीत चुका है लेकिन आज भी उनकी बातें वातावरण में गूंज रही हैं। हम आले सऊद का समर्थन नहीं करते, हम उसको शासक नहीं मान सकते जिसने एक नागरिक के रूप में मेरी प्रतिष्ठा छीन ली है।

आले सऊद के हर अन्याय पूर्ण फ़ैसले के बाद शैख़ निम्र की आवाज़ गूंजने लगती है कि हम आले सऊद कर समर्थन नहीं करते। हमने उन्हें अपना शासक  नहीं चुना है और न ही ईश्वर ने उन्हें यह अधिकार दिया है कि हम उनका समर्थन करने लगें वह तो हम पर अत्याचार से शासन कर रहे हैं।

शैख़ निम्र ने जिस भ्रष्टाचार की बात कही थी उसके बारे में वैसे तो सभी जानते हैं लेकिन हालिया दिनों क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने एक पांच सितारा होटल में सैकड़ों राजकुमारों, मंत्रियों और पूर्व मंत्रियों को क़ैद किया  और फिर रिश्वत लेकर उनमें से कुछ को छोड़ा तो यह सच्चाई और भी खुलकर सामने आ गई।

मुहम्मद बिन सलमान ने अपने चचेरे भाई मुहम्मद बिन नाएफ़ को जिस साज़िश के तहत क्राउन प्रिंस के पद से हटाया और यह पद हथिया लिया उससे एक बार फिर यह सच्चाई सामने आई कि सऊदी अरब में सत्ता का सारा खेल अन्याय और अत्याचार, धोखे और ज़बरदस्ती पर आधारित है।

सऊदी अरब ने यमन पर युद्ध थोप दिया। भारी संख्या में बच्चों और महिलाओं को शहीद किया। यमन में मरने वालों की संख्या 12 हज़ार से अधिक और कुछ आंकड़ों के अनुसार 16 हज़ार तक पहुंच चुकी है। इससे भी सऊदी शासन की हक़ीक़त और प्रवृत्ति का पता चलता है।

शहीद शैख़ निम्र बाक़िर अन्निम्र की सारी बातें बार बार प्रमाणित हो रही हैं। देखना यह है कि आले सऊद शासन के पतन का उनकी कामना कब पूरी होती है।  

 

Jan ०२, २०१८ २१:०२ Asia/Kolkata
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