इस्राईली संसद नेसेट में "एकजुट क़ुद्स" कानून पारित हो गया है।

इस कानून के अनुच्छेद इस बात के सूचक हैं कि बैतुल मुकद्दस जायोनी शासन के अवैध अस्तित्व का भाग बनेगा। जायोनी शासन की संसद में पारित होने वाले कानून में आया है कि बैतुल मुकद्दस का विभाजन नेसेट के 80 सांसदों की सहमति के बिना संभव नहीं होगा।

इस कानून का अर्थ, फिलिस्तीन के अतिग्रहित क्षेत्रों में दो सरकारों के प्रस्ताव का पूर्णरूप से समाप्त हो जाना है।

क्योंकि जायोनी शासन इस कानून के अनुसार किसी भी स्थिति में पूर्वी बैतुल मुकद्दस से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है और दूसरी ओर बैतुल मुकद्दस के किसी भी भाग को फिलिस्तीनियों के हवाले करने के लिए नेसेट के 80 सांसदों के मतों की आवश्यकता है जबकि इससे पहले इसके लिए केवल 60 सांसदों के मतों की आवश्यकता थी।

दूसरे शब्दों में अब तथाकथित शांति वार्ता प्रक्रिया में प्रगति की बहुत कम अपेक्षा है।

इसी कारण फिलिस्तीनी प्रशासन के प्रवक्ता ने घोषणा की है कि "एकजुट कुद्स" कानून के पारित होने का अर्थ फिलिस्तीनी राष्ट्र के खिलाफ युद्ध की घोषणा है।

"एकजुट कुद्स" कानून के संबंध में एक ध्यान योग्य बिन्दु यह है कि यह कानून अचानक पारित नहीं हुआ है बल्कि यह पूर्वनियोजित कार्यक्रम के अनुसार हुआ है।  

"एकजुट कुद्स" कानून के संदर्भ में एक अन्य विषय है कि यह कानून राष्ट्रसंघ विशेषकर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2334 के खिलाफ है।

इस प्रस्ताव के पक्ष में सुरक्षा परिषद के 14 सदस्यों ने मत दिया था और केवल अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट दिया था। इस प्रस्ताव के अनुसार फिलिस्तीन के अतिग्रहित क्षेत्रों में इस्राईल को हर प्रकार के निर्माण से मना किया गया है।

जायोनी शासन ने "एकजुट कुद्स" कानून पारित करके दर्शा दिया है कि राष्ट्रसंघ की महासभा के प्रस्ताव और विश्व समुदाय की आपत्ति का उसके निर्णयों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

बहरहाल कुल मिलाकर कहना चाहिये कि "एकजुट कुद्स" कानून का अर्थ यह है कि जायोनी शासन अंतरराष्ट्रीय नियमों व कानूनों पर ध्यान दिये बिना अपने लिए कानून पारित करता है। MM

Jan ०३, २०१८ २१:०७ Asia/Kolkata
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