• युद्ध हुआ तो लेबनान नहीं इस्राईल जाएगा पाषाण युग में, कई दिशाओं से बरसेंगे मिसाइल, ज़ायोनियों को नहीं मिलेगी छिपने की जगह

इस्राईली नेतृत्व ने अनजाने में लेबनान को एकजुटता का तोहफ़ा दे दिया है। इस्राईली अधिकारियों ने ज़मीनी और समुद्री सीमाओं पर अपनी उत्तेजक हरकतों के ख़िलाफ़ जिनसे इस्राईल के शत्रुतापूर्ण और विस्तारवादी इरादे साफ़ ज़ाहिर हैं, लेबनान के सारे धड़े एकजुट हो गए।

लेबनान की दक्षिणी सीमा पर जो इस्राईल से मिलती है इन दिनों असामान्य घटनाएं हो रही हैं जिनकी वजह से बहुत से लोग यह मानते हैं कि किसी भी समय लेबनान और इस्राईल के बीच तीसरा युद्ध शुरू हो सकता है। यह एसा युद्ध होगा जिसके लिए लेबनान ने सेना, जनता और प्रतिरोधक बल के स्तर पर मनोवैज्ञानिक और सामरिक रूप से लंबे समय से तैयारी की है।

पहला उत्तेजक व उन्मादपूर्ण बयान इस्राईल के युद्ध मंत्री एविग्डर लेबरमैन की ओर से आया जिसमें उन्होंने दावा किया कि लेबनान की जलसीमा के भीतर स्थित ब्लाक-9 गैस फ़ील्ड इस्राईल की संपत्ति है। उन्होंने इटली, रूस और फ़्रांस की कंपनियों के कंसरशियम को चेतावनी दी कि इस गैस फ़ील्ड में वह किसी भी प्रकार की खोज और डेवलपमेंट का काम न करे।

दूसरी उत्तेजक कार्यवाही इस्राईल की उस योजना की घोषणा है जिसके तहत इस्राईल लेबनान की सीमा पर दीवार बनाना चाहता है। इस्राईल की यह योजना संघर्ष विराम संधि का उल्लंघन है और यदि इस्राईल यह दीवार बनाता है तो लेबनान के सौकड़ों वर्ग किलोमीटर इलाक़े उसके हाथ से निकल जाएंगे।

कई इस्राईली अधिकारियों ने धमकी दी है कि वह लेबनान को पाषाण युग में भेज देंगे लेकिन इस धमकी का न तो लेबनान की जनता पर कोई असर हुआ और न ही सरकार पर बल्कि इस्राईली विस्तारवाद का मुंह तोड़ जवाब देने  का उनका संकल्प और भी मज़बूत हुआ। जो भी हालात होंगे उसकी जिम्मेदारी इस्राईल की ही होगी क्योंकि वही हालात ख़राब करने की कोशिश कर रहा है।

लेबान की सीमा पर इस्राईल ने सैनिक तैयारी बढ़ा दी है और सेना को हाई एलर्ट कर दिया है, उधर लेबनानी सेना ने भी तैयारी कर ली है।

लेबनान की सुप्रीम रक्षा समिति की बैठक राष्ट्रपति भवन में हुई जिसमें राष्ट्रपति मिशल औन, प्रधानमंत्री सअद हरीरी और संसद सभापति नबीह बिर्री ने भी भाग लिया इसी प्रकार सेना के वरिष्ठ कमांडर भी बैठक में मौजूद थे। यह फ़ैसला किया गया कि लेबनान की धरती पर इस्राईल को हरगिज़ दीवार का निर्माण नहीं करने दिया जाएगा क्योंकि यह लेबनान की राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन है। समिति ने लेबनानी बलों को निर्देश दिया है कि इस्राईल की हर शत्रुतापूर्ण कार्यवाही का मुंहतोड़ जवाब दिया जाए। बयान में कहा गया है कि हम दीवार के निर्माण को सैन्य बल से रोकेंगे और हमारे अंदर इसकी क्षमता मौजूद है।

यदि युद्ध होता है तो पाषाण युग में लेबनान नहीं इस्राईल जाएगा। युद्ध में हुआ और एक नहीं कई दिशांओं से मिसाइलों की बरसात शुरू हो गई तो इस्राईलियों को यह नज़र नहीं आएगा कि कहां भाग कर जान बचाएं।

लेबनान के हिज़्बुल्लाह आंदोलन के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह इस्राईली योजना को बहुत पहले ही भांप गए थे और उन्होंने सन 2011 में ही इस्राईल को चेतावनी दे दी थी कि जो भी लेबनान के गैस फ़ील्ड को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश करेगा उसके अपने प्रतिष्ठान सुरक्षित नहीं रहेगी और शत्रु को पता भी है कि हम इसमें सक्षम हैं।

जिस समय सैयद हसन नसरुल्लाह ने यह धमकी दी थी उस समय हिज़्बुल्लाह की मिसाइल ताक़त वर्तमान समय की तुलना में दस गुना कम थी इसी तरह हिज़्बुल्लाह के संघर्षकर्ताओं के पास युद्ध का वह अनुभव नहीं था जो पिछले चार वर्षों में सीरिया में जारी लड़ाई के दौरान उसे हासिल हो चुका है।

इस्राईली सेना में काम कर चुके कमांडर और विशेषज्ञ बार बार इस्राईल को चेतावनी दे रहे हैं और कह रहे हैं कि हिज़्बुल्लाह के पास कम से कम डेढ़ लाख मिसाइल मौजूद हैं। अब अगर इस भंडार के साथ ईरान और सीरिया के मिसाइल भंडारों को भी जोड़ दिया जाए तो फिर हमें सैयद हसन नसरुल्लाह की उस नसीहत की गहराई समझ में आती है जो उन्होंने ज़ायोनियों को की थी। उन्होंने कुछ महीने पहले कहा था कि अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन की धरती पर बसे ज़ायोनियों को चाहिए कि जितनी जल्दी संभव हो इस इलाक़े से निकल जाएं वरना युद्ध हुआ तो वह ईंधन बनेंगें

लेबनान अपनी तेल व गैस की दौलत से एक इंच भी पीछे हटने वाला नहीं है और न ही अपनी धरती का एक इंच भाग छोड़ने वाल है बल्कि लेबनान उन सात गावों को भी वापस लेने की तैयारी में है जिन पर वर्ष 1948 के युद्ध में इस्राईल ने क़ब्ज़ा कर लिया था।

इस्राईल अपनी रक्षा के लिए दीवारें बना रहा है लेकिन यह दीवारें उसका बचाव नहीं कर पा रही हैं बल्कि उसके लिए एक मुसीबत बनती जा रही हैं। इस्राईल ने अपनी रक्षा के लिए मिसाइल ढाल व्यवस्था आयरन डोम स्थापित कर रखी है लेकिन यह मिसाइल ढाल व्यवस्था जब फ़िलिस्तीनी संगठनों हमास और जेहादे इस्लामी के मिसाइलों से उसे नहीं बचा पा रही है तो फिर एक साथ लेबनान, सीरिया, ईरान और ग़ज्ज़ा पट्टी से बरसने वाले मिसाइलों का सामना वह कैसे कर सकती हैं?

इस्राईल जो दीवारे बना रहा है वह वास्तव में उसक ख़ौफ़ को दर्शाती हैं, इस्राईली अधिकारी बौखलाहट में भड़काई बयान दे रहे हैं, उन्हें शायद पता नहीं कि ज़माना बदल चुका है और अब उनके सामने वह शत्रु नहीं हैं जो इस्राईली हमला शुरू होते ही हार मान लेते थे बल्कि उसका सामना एसे शत्रु से है जो हथियार डालना नहीं जानते। पश्चिमी तट के इलाक़े में होने वाली हालिया कार्यवाहियां उसका उपयुक्त उदाहरण हैं।

 

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के प्रख्यात लेखक व टीकाकार

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Feb ०८, २०१८ १६:२८ Asia/Kolkata
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