सीरिया के विदेशमंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष के नाम अलग- अलग पत्र भेजकर राजधानी दमिश्क के उत्तर में स्थित जमराया क्षेत्र में इस्राईल के नये प्रक्षेपास्त्रिक हमले पर आपत्ति जताई है।

जायोनी शासन हर कुछ समय पर सीरिया पर जो हमले करता है उसका लक्ष्य सशस्त्र आतंकवादी गुटों के मनोबल को बढ़ाना और सीरिया संकट को लंबा खींचना है।

जायोनी शासन की आतंकवादी कार्यवाहियों और आतंकवादी गुटों के मध्य समन्वय से इस बात में कोई संदेह नहीं रह गया है कि इस्राईल का ख़तरा दाइश एवं जिब्हतुन्नुस्रा जैसे आतंकवादी गुटों के ख़तरे से कम नहीं है।

वास्तव में सीरियाई जनता के व्यापक जनसंहार में जायोनी शासन की आतंकवादी गतिविधियां और आतंकवादी एक दूसरे के पूरक हैं। जायोनी शासन ने सीरिया के विभिन्न क्षेत्रों पर हमला करके इस देश की संप्रभुता का उल्लंघन किया है।

सीरिया संकट के अस्तित्व में आने और आतंकवादी गुटों के समर्थन में जायोनी शासन की काफी सक्रिय भूमिका रही है। सीरिया संकट को आरंभ हुए लगभग 7 वर्ष हो रहे हैं तब से अब तक जायोनी शासन ने आतंकवादी गुटों के समर्थन के लक्ष्य से बारमबार सीरिया पर हमला किया है।

क्षेत्र में अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए आतंकवाद और जायोनिज़्म पश्चिम के दो हथकंडे हैं। इसी संबंध में फिलिस्तीन के फत्वा केन्द्र ने घोषणा की है कि जायोनी शासन और तकफीरी आतंकवादी एक ही सिक्के के दो रूप हैं।

बहरहाल इस बात में कोई संदेह नहीं है कि जायोनी शासन के अपराधों व अतिक्रमणों के मुकाबले में संयुक्त राष्ट्रसंघ की ढ़िलाई   इस बात का कारण बनी है कि सीरिया यथावत जायोनी शासन और आतंकवादी गुटों की अमानवीय कार्यवाहियों का मैदान बना रहे। MM

 

 

Feb ०८, २०१८ १९:४६ Asia/Kolkata
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