कतर से कई महीनों तक संबंध विच्छेद के बाद जार्डन ने दोबारा अपने संबंधों को बहाल करने की दिशा में प्रयास आरंभ कर दिया है।

इसी संबंध में जार्डन ने कतर से अपने व्यापारिक व पूंजी निवेश के संबंधों को नये सिरे से आरंभ कर दिया है। सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब इमारात और बहरैन ने लगभग नौ महीने पहले कतर से अपने राजनीतिक व कूटनयिक संबंधों को तोड़ लिया था।

जार्डन ने भी सऊदी अरब और उसके घटकों की नीतियों का अनुसरण करते हुए कतर के साथ अपने कूटनयिक संबंधों की सतह को कम करके उसे प्रभारी स्तर का कर दिया था और कतर के राजदूत को अपने यहां से निकाल दिया था।

जार्डन ने ऐसी स्थिति में कतर के साथ अपने संबंधों की सतह को कम कर दिया था जब फार्स की खाड़ी के दो देश कुवैत और ओमान सऊदी अरब और कतर के मध्य उत्पन्न विवाद के समाधान के प्रयास में हैं और कतर के संबंध में सऊदी अरब की जो नीति है उससे वे अधिक सहमत नहीं हैं।

अरब संघ के 22 देशों में से मात्र सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात, बहरैन, मिस्र, लीबिया, मोरतानिया और कोमोर वे देश हैं जिन्होंने कतर के साथ संबंध विच्छेद किया है।

इस प्रकार की परिस्थिति में कतर और जार्डन के संबंधों को नये सिरे से सामान्य करने के प्रयास इस बात के सूचक हैं कि कतर के संबंध में सऊदी अरब ने जो नीति अपना रखी है वह प्रभावहीन होती जा रही है।

हालिया महीनों में कतर के साथ संबंधों को दोबारा सामान्य या मजबूत करने हेतु अरब देशों के प्रयासों का अर्थ यह है कि अधिकांश अरब देशों ने स्वेच्छा से सऊदी अरब की नीतियों को कबूल नहीं किया था बल्कि दबाव में आकर उन्होंने सऊदी अरब की नीतियों को स्वीकार किया था और कतर के मुकाबले में यह कूटनयिक विफलता क्षेत्र में सऊदी अरब की विफलता समझी जा रही है।

बहरहाल जानकार हल्कों का मानना है कि सऊदी अरब के मुकाबले में कतर की तर्कसंगत नीति और सऊदी अरब की अतार्किक नीति उसकी विफलता का कारण बनी है। MM

 

 

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Mar १३, २०१८ २०:५१ Asia/Kolkata
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