• सऊदी अरब भी अजीब मुस्लिम देश है कि पवित्र रमज़ान के आते ही यमन के मुसलमानों पर हमले तेज़ कर देता है

यमन के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन अंसारुल्लाह के महासचिव ने कहा है कि इस्लामी देशों में होने वाली तमाम साज़िशों के पीछे अमेरिका और इस्राईल का हाथ है।

यमन के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन अंसारुल्लाह के महासचिव अब्दुल मलिक बदरुद्दीन अलहौसी ने गुरुवार को यमन की राजधानी सनआ में स्वयंसेवी बलों और यमनी राष्ट्र को पवित्र रमज़ान के मुबारक महीने के आगमन पर देश दुनिया के सभी मुसलमानों को मुबारकबाद देते हुए कहा कि इस्लामी देशों के ख़िलाफ़ की जाने वाली साज़िशों का केवल एक ही उद्देश्य है और वह यह है कि मुसलमानों के बीच फूट डालना।  

अंसरुल्लाह आंदोलन के प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि रमज़ान का यह मुबारक महीना इस साल ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब यमन की जनता के सामने कई समस्याएं और कठिनाइयां मौजूद हैं और वह लगातार चौथे वर्ष के रमज़ान महीने में अमेरिका और इस्राईल की मदद से किए जाने वाले सऊदी अरब के हमलों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब भी अजीब मुस्लिम देश है कि रमज़ान आते ही यमन की मुसलमान और रोज़ेदार जनता पर हमले तेज़ कर देता है।

अंसारुल्लाह के प्रमुख ने कहा कि इस्लामी जगत को असामान्य ख़तरों और साज़िशों का सामना है। उन्होंने कहा कि इस्लामी देशों को दुश्मनों के साथ-साथ उनसे भी ख़तरा है जो मुसलमानों के भेंस में मुसलमानों को धोखा दे रहे हैं जबकि वह इस्लाम दुश्मन ताक़तों के पिट्ठू हैं जिनका काम केवल अपने मालिकों के आदेशों का पालन करना है। अब्दुल मलिक हौसी ने कहा कि मुसलमानों के बीच फूट डालने और उनको आपस में लड़ाने के मुख्य साज़िशकर्ता अमेरिका और इस्राईल हैं।

अलहौसी ने कहा कि बैतुल मुक़द्दस अपना दूतावास स्थानांतरित करके अमेरिका ने यह साबित कर दिया कि उसका केवल एक ही उद्देश्य है और वह यह है कि किसी भी तरह इस्लाम के पवित्र स्थलों को नुक़सान पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि इन सब के बावजूद कुछ इस्लामी देश इस कोशिश में हैं कि अमरीका और इस्राईल से उनके संबंध अच्छे हो जाएं और साथ ही यह भी बताने का प्रयास करते हैं कि अमेरिका और इस्राईल में अंतर है। अब्दुल मलिक हौसी ने कहा कि अमेरिका और इस्राईल एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जो पूरे इस्लामी जगत के लिए सबसे बड़ा ख़तरा हैं। (RZ)

 

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मई १७, २०१८ २०:३५ Asia/Kolkata
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