अरब इस्लामी देश यमन के ख़िलाफ़ सऊदी अरब ने मार्च 2015 से युद्ध छेड़ रखा है जो अब तक जारी है। सऊदी अरब इस देश में अपनी मर्ज़ी की सरकार चाहता है जबकि स्थानीय धड़ों का बड़ा भाग यह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

संयुक्त अरब इमारात भी यमन में अपनी पैठ बनाने की कोशिश में है और संदर्भ में वह सऊदी अरब के गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद सऊदी अरब से मुक़ाबला भी कर रहा है।

सऊदी गठबंधन ने अपनी सैनिक चढ़ाई का यह अंजाम देखकर अब एक बार फिर से नया आप्रेशन शुरू किया है। इस बार इस गठबंधन ने लाल सागर के तट पर स्थित अलहुदैदा बंदरगाह को निशाना बनाया है। पश्चिमी यमन की तटी नगर हुदैदा की बंदरगाह लाल सागर में यमन की सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है और युद्ध का दंश झेल रहे इस देश के लिए भेजी जाने वाली मानवता प्रेमी सहायताओं का 70 से 80 प्रतिशत भाग इसी बंदरगाह के माध्यम से यमन पहुंच रहा है।

ज़मीनी सच्चाई यह है कि यमन की लड़ाई सऊदी अरब ने शुरू तो कर दी लेकिन अंजाम का अनुमान उसे भी नहीं था यही कारण है कि सऊदी अरब के भीतर क्राउन प्रिंस के ख़िलाफ़ भावनाएं भड़क रही हैं कि उन्होंने देश को गंभीर युद्ध की दलदल में फंसा दिया है। यह युद्ध जब तक चलता रहेगा सऊदी अरब इस दलदल में उतनी ही गहराई में धंसता रहेगा देखना यह है कि कब सऊदी अरब को अक़्ल आती है।  

Jun १८, २०१८ १९:४१ Asia/Kolkata
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