यमनी बलों के ड्रोन विमानों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ में आरामको तेल कंपनी की एक रिफ़ाइनरी पर हमला किया है और सऊदी अरब ने भी इस बात को स्वीकार करते हुए कहा है कि इस हमले से रिफ़ाइनरी में आग लग गई।

यमन के लिए सऊदी अरब ने जो सपने देखे थे वह बिखरते जा रहे हैं और यमन युद्ध सऊदी अरब के लिए एक डरावने सपने में बदलता जा रहा है। इस युद्ध के आरंभिक दिनों में केवल आले सऊद और उसके घटक हमला किया करते थे लेकिन अब इस युद्ध का नक़शा बदल चुका है। किसी दिन कोई सैन्य अड्डा, किसी दिन हवाई अड्डा, किसी दिन शाही महल और किसी दिन रियाज़ में रिफ़ाइनरी को यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों की ओर से निशाना बनाया जा रहा है।

 

सऊदी अरब ने जो युद्ध आरंभ किया था उसे ख़त्म करने की अब उसमें क्षमता नहीं है क्योंकि उसने यमन के अपदस्थ और भगोड़े राष्ट्रपति को पुनः सत्ता में लाने के उद्देश्य से इस ग़रीब अरब देश पर हमला किया था लेकिन उसका वास्तविक उद्देश्य अंसारुल्लाह जनांदोनल को कमज़ोर बनाना था मगर अब अधिकांश टीकाकारों का कहना है कि अंसारुल्लाह अब यमन का सबसे संगठित राजनैतिक बल है और उसे नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता।

 

एेसा प्रतीत होता है कि जैसे जैसे समय बीत रहा है, वैसे वैसे हालात सऊदी अरब के लिए अधिक ख़राब होते जा रहे हैं क्योंकि पिछले चालीस महीने के युद्ध ने दर्शाया है कि यमन की सेना और स्वयं सेवी बलों ने अपनी प्रतिरक्षा क्षमता में अत्यधिक वृद्धि कर ली है जबकि सऊदी अरब और उसके घटकों को अधिक से अधिक नुक़सान उठाना पड़ रहा है। एक टीकाकार का के अनुसार इसकी मुख्य वजह यह है कि सऊदी अरब ने 1991 से किसी युद्ध में भाग नहीं लिया है जबकि हूसियों को कई दशकों के छापामार युद्ध का अनुभव हासिल है। (HN)

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Jul १९, २०१८ १६:२३ Asia/Kolkata
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